RSS

रि पोस्ट – सौर कैलेंडर पर आधारित एकमात्र पर्व – मकर संक्रांति

14 जनवरी
भारत में मनाए जाने वाले पर्वों में मकर संक्रांति एकमात्र ऐसा पर्व है जो सौर कैलेंडर पर आधारित है जिसकी वजह से यह पर्व हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है। शेष सभी पर्व चंद्र कैलेंडर पर आधारित होते हैं।
संस्कृत और कर्मकांड के विद्वान डा रविनाथ शुक्ला ने बताया कि चंद्रमा की तुलना में सूर्य की गति लगभग स्थिर जैसी होती है और मकर संक्रांति सौर कैलेंडर पर आधारित पर्व है इसलिए इसकी तारीख नहीं बदलती। उन्होंने बताया कि देश में मनाए जाने वाले अन्य पर्वों की तारीख बदलती रहती है क्योंकि वह चंद्र कैलेंडर पर आधारित होते हैं और चंद्रमा की गति सूर्य की तुलना में अधिक होती है।
डा. रवि ने बताया कि संक्रांति संस्कृत का शब्द है जो सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश बताता है। हिंदू ज्योतिष के अनुसार, कुल बारह राशियां होती हैं। इस प्रकार संक्रांति भी 12 हुईं। लेकिन मकर संक्रांति तब मनाई जाती है जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। उन्होंने बताया कि पृथ्वी को कर्क और मकर रेखाएं काटती हैं। जब सूर्य कर्क रेखा को पार करता है तो पृथ्वी के आबादी वाले हिस्से में उसका प्रकाश कम आता है। इसी दौरान धनु में सूर्य का संचार होने पर सर्दी अधिक होती है जबकि मकर में सूर्य का संचार होने पर सर्दी कम होने लगती है। मकर संक्रंाति से गर्मी तेज होने लगती है और हवाएं चलने लगती हैं। बसंत पंचमी से ये हवाएं गर्म होने लगती हैं जिसकी वजह से रक्त संचार बढ़ जाता है। यही वजह है कि लोगों को बसंत में स्फूर्ति का अहसास होता है। पेड़ों पर नए पत्ते आने के साथ साथ फसल पकने की प्रक्रिया भी गर्म हवा लगने से शुरू हो जाती है। इसलिए कृषि के नजरिए से मकर संक्रंति अहम पर्व होता है।
मकर संक्रांति का पर्व ऐसा पर्व है जो भारत के अलग-अलग प्रदेशों में अलग अलग नामों से मनाया जाता है। महाराष्ट्र में इस पर्व को ‘तिलगुल’ कहा जाता है। राजधानी के एक बैंक में कार्यरत सुप्रिया पाटिल ने बताया कि महाराष्ट्र में मकर संक्रांति पर घर के लोग सुबह पानी में तिल के कुछ दाने डाल कर नहाते हैं। महिलाएं रंगोली सजाती हैं और पूजा की जाती है। पूजा की थाली में तिल जरूर रखा जाता है। इसी थाली से सुहागन महिलाएं एक दूसरे को कुंकुम, हल्दी और तिल का टीका लगाती हैं। इस दिन तिल के विशेष पकवान भी पकाए जाते हैं। हल्दी कुंकुम का सिलसिला करीब 15 दिन चलता है।
एक सरकारी स्कूल की सेवानिवृत्त प्राचार्य तेजिंदर कौर ने बताया कि सिख मकर संक्रांति को माघी कहते हैं। इस दिन उन 40 सिखों के सम्मान में सिख गुरूद्वारे जाते हैं जिन्होंने दसवें गुरू गोविंद सिंह को शाही सेना के हाथों पकड़े जाने से बचाने के लिए अपनी कुर्बानी दी थी। इस दिन हमारे यहां खीर जरूर बनती है।
हिमाचल प्रदेश और हरियाणा में भी माघी की धूम होती है। बिहार में 14 जनवरी को संक्रांति मनाई जाती है। इस दिन लोग सुबह सवेरे स्नान के बाद पूजा करते हैं तथा मौसमी फल और तिल के पकवान भगवान को अर्पित करते हैं। इसके अगले दिन यहां मकरांत मनाई जाती है जिस दिन खिचड़ी का सेवन किया जाता है।
बुंदेलखंड और मध्यप्रदेश में भी इस पर्व को संक्रांत कहा जाता है। गुजरात में यह पर्व दो दिन मनाया जाता है। 14 जनवरी को उत्तरायण और 15 जनवरी को वासी उत्तरायण। दोनों दिन पतंग उड़ाई जाती है। घरों में तिल की चिक्की और जाड़े के मौसम की सब्जियों से उंधियू पकाया जाता है।
मकर संक्रांति को कर्नाटक में सुग्गी कहा जाता है। इस दिन यहां लोग स्नान के बाद संक्रांति देवी की पूजा करते हैं जिसमें सफेद तिल खास तौर पर चढ़ाए जाते हैं। पूजा के बाद ये तिल लोग एक दूसरे को भेंट करते हैं। केरल के सबरीमाला में मकर संक्रांति के दिन मकर ज्योति प्रज्ज्वलित कर मकर विलाकू का आयोजन होता है। यह 40 दिन का अनुष्ठान होता है जिसके समापन पर भगवान अयप्पा की पूजा की जाती है।
राजस्थान में मकर संक्रांत के दिन लोग तिल पाटी, खीर का आनंद लेते हैं और पतंग उड़ाते हैं। उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद, वाराणसी और हरिद्वार में गंगा के घाटों पर तड़के ही श्रद्धालु पहुंच कर स्नान करते हैं। इसके बाद पूजा की जाती है। उत्तराखंड में इस पर्व की खास धूम होती है। इस दिन गुड़, आटे और घी के पकवान पकाए जाते हैं और इनका कुछ हिस्सा पक्षियों के लिए रखा जाता है।
उड़ीसा में मकर संक्रांति को मकर चौला और पश्चिम बंगाल में पौष संक्रांति कहा जाता है। असम में यह पर्व बीहू कहलाता है। यहां इस दिन महिलाएं और पुरूष नए कपड़े पहन कर पूजा करते हैं और ईश्वर से धनधान्य से परिपूर्णता का आशीर्वाद मांगते हैं। गोवा में इस दिन वर्षा के लिए इंद्र देवता की पूजा की जाती है ताकि फसल अच्छी हो। तमिलनाडु में यह पर्व पोंगल कहलाता है। इस दिन से तमिलों के थाई माह की शुरूआत होती है। इस दिन तमिल सूर्य की पूजा करते हैं और उनसे अच्छी फसल के लिए आशीर्वाद मांगते हैं। यह पर्व राज्य में चार दिन मनाया जाता है।
आंध्रप्रदेश में भी यह पर्व चार दिन मनाया जाता है। पहले दिन ‘भोगी’ दूसरे दिन ‘पेड्डा पांडुगा’ [मकर संक्रांति] तीसरे दिन कनुमा और चौथे दिन मुक्कानुमा मनाया जाता है।

तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश में भोगी के दिन घर का पुराना और अनुपयोगी सामान निकाला जाता है और शाम को उसे जलाया जाता है।
(जागरण से साभार)
आप सभी को मकर संक्रांति की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
Advertisements
 

6 responses to “रि पोस्ट – सौर कैलेंडर पर आधारित एकमात्र पर्व – मकर संक्रांति

  1. अन्तर सोहिल

    जनवरी 14, 2012 at 11:32 पूर्वाह्न

    आपको भी मकर संक्रांति पर्व की हार्दिक शुभकामनायें

     
  2. ब्लॉ.ललित शर्मा

    जनवरी 14, 2012 at 12:03 अपराह्न

    मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई…

     
  3. रश्मि प्रभा...

    जनवरी 14, 2012 at 12:16 अपराह्न

    मैं हमेशा १४ को ही मकर संक्रांति मनाती हूँ … बचपन से यही जाना … जानकारी अच्छी दी है ,
    शुभकामनाएं

     
  4. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    जनवरी 14, 2012 at 4:19 अपराह्न

    अच्छी पोस्ट!!!

     
  5. प्रवीण पाण्डेय

    जनवरी 14, 2012 at 7:34 अपराह्न

    विश्वकर्मापूजा भी सौर कैलेन्डर पर आधारित है, संभवत १७ सितम्बर

     
  6. दिगम्बर नासवा

    जनवरी 17, 2012 at 6:54 अपराह्न

    इस दिन की बेहतरीन जानकारी दी है आपने … हर किसी को ये महत्व नहीं पता …

     

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

 
%d bloggers like this: