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सैनिक धर्म

05 जनवरी
मैं भारत माँ का प्रहरी हूँ , घायल हूँ पर तुम मत रोना,
साथी घर जाकर कहना , संकेतों में बतला देना,
यदि हाल मेरे पिताजी पूछे तो,
खाली पिंजरा दिखा देना,
इतने पर भी वह न समझे तो
तो होनी का मर्म समझा देना
यदि हाल मेरी माताजी पूछे तो
मुर्झाया फूल दिखा देना
इतने पर भी वह न समझे तो
दो बूंद आंशु बहा देना
यदि हाल मेरी पत्नी पूछे तो,
जलता दीप बुझा देना
इतने पर वह न समझे तो
मांग का सिंदूर मिटा देना
यदि हाल मेरा बेटा पूछे तो
माँ का प्यार जाता देना
इतने पर वह न समझे तो
सैनिक धर्म बतला देना …

( आज फेसबुक के हल्ला बोल क्लब पर Shiv Pratap Singh Srinet जी के प्रोफाइल पर यह कविता दिखी तो मन में आया कि यह आप सब तक भी पहुंचनी चाहिए … सो उनसे आज्ञा ले कर यहाँ प्रस्तुत कर दी )
 
जय हिंद … जय हिंद की सेना !!!
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14 टिप्पणियाँ

Posted by on जनवरी 5, 2012 in बिना श्रेणी

 

14 responses to “सैनिक धर्म

  1. देव कुमार झा

    जनवरी 5, 2012 at 12:48 अपराह्न

    शायद इसकी प्रशंसा मे शब्द कम हैं….. बहुत अच्छी प्रस्तुति…. हम केवल लाईक किये और आप ब्लाग पर ले आए….. वाह शिवम भईया आज लाज़वाब हैं…. 🙂

     
  2. ब्लॉ.ललित शर्मा

    जनवरी 5, 2012 at 1:55 अपराह्न

    सुंदर कविता है, कई दिनों से ढूंढ रहा था। बचपन में पढी थी। आभार

     
  3. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    जनवरी 5, 2012 at 2:45 अपराह्न

    यह कविता सिर झुकाने वाली वाली है!! आज बी.एस.एफ. हेडक्वार्टर्स में भी जलसा जैसा कुछ था.. उधर से ही आ रहा हूँ अभी!!

     
  4. नीरज गोस्वामी

    जनवरी 5, 2012 at 4:35 अपराह्न

    मार्मिक रचना…

    नीरज

     
  5. shikha varshney

    जनवरी 5, 2012 at 5:43 अपराह्न

    सर झुक जाता है श्रद्धा से ऐसी रचनाओं पर.

     
  6. रश्मि प्रभा...

    जनवरी 5, 2012 at 8:44 अपराह्न

    माँ का विश्वास है … सारे धर्म निभाएगा

     
  7. दिलीप

    जनवरी 6, 2012 at 3:12 पूर्वाह्न

    us shwet himon par hari bhuja se laal rang jab girta hai..balidaan amar ho jaata hai, tab ek tiranga banta hai…sainik ko salaam , jo seema par hain aur jo desh ke andar bhi tainaat hain…bahut sundar rachna…

     
  8. Rss Vaishali

    जनवरी 6, 2012 at 9:16 पूर्वाह्न

    मार्मिक कविता …

    यद्यपि बहुत पहले सुना था इसे

     
  9. प्रवीण पाण्डेय

    जनवरी 6, 2012 at 10:31 अपराह्न

    जय हिंद..

     
  10. उपेन्द्र नाथ

    जनवरी 7, 2012 at 11:15 पूर्वाह्न

    एक सैनिक के मर्म को उद्धरित करती हुई सुंदर कविता ………..

     
  11. Mukesh Kumar Sinha

    जनवरी 9, 2012 at 11:49 पूर्वाह्न

    hamare desh ke karndhaar, hame bacha ke rakhne wale … tumhe naman\!!

     
  12. बी एस पाबला BS Pabla

    जनवरी 10, 2012 at 11:15 पूर्वाह्न

    जय हिंद

     
  13. प्रतीक माहेश्वरी

    जनवरी 12, 2012 at 11:30 पूर्वाह्न

    क्या बेहतरीन शब्दों में सैनिक धर्म का मर्म बतलाया है.. बहुत ही बेहतरीन रचना है.. साथ-बांटने के लिए धन्यवाद..

    प्यार में फर्क पर अपने विचार ज़रूर दें…

     

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