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डाइबिटिक रेटिनोपैथी हल्के में लेना पड़ेगा भारी

14 दिसम्बर
हम में से सब को अपना अपना परिवार बेहद प्रिय होता है … और होना भी चाहिए … अगर परिवार के एक भी सदस्य पर कोई विपत्ति आ जाये तो पूरा परिवार परेशान हो जाता है … ख़ास कर अगर परिवार का सब से ज़िम्मेदार बन्दे पर कोई विपत्ति आ जाये तो मामला और भी संजीदा हो जाता है … ऐसा ही कुछ हुआ है मेरी ससुराल पक्ष में … मेरे मामा ससुर साहब श्री बाल कृष्ण चतुर्वेदी जी पिछले काफी महीनो से जूझ रहे है अपनी बीमारी से … मामा जी को शुगर है और इसी के कारण लगभग ४ महिना पहले अचानक उनकी दोनों आँखों की रौशनी चली गयी … हम सब काफी परेशान हो गए कि यह अचानक से क्या हो गया … बाल कृष्ण मामा जी ही पूरे परिवार को संभालें हुए है पिछले २ सालों से … जब एक एक सालों के अंतर से उनके दो भाइयो का निधन हो गया ! 
मेरी जानकारी में भी यह पहला मामला था कि जब शुगर के चलते किसी की आँखों की रौशनी जाने के बारे में सुना हो … खैर आजकल मामा जी पहले से काफी बहेतर है … उनका इलाज चल रहा है और भगवान् ने चाहा तो बहुत जल्द उनको पूरा आराम भी आ जायेगा! 
आज ऐसे ही नेट पर कुछ खंगालते हुए एक आलेख पर नज़र पड़ी … जिस को पढ़ कर मामाजी का ख्याल आ गया और साथ साथ उनकी बीमारी के बारे में भी काफी जानकारी मिल गयी ! यहाँ उस आलेख को आप सब के साथ साँझा कर रहा हूँ ताकि आप सब को यह जानकारी मिल सकें !
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मधुमेह के आँख पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से कम लोग ही वाकिफ हैं। डाइबिटिक रेटिनोपैथी एक ऐसा रोग है, जिसमें आँख की रेटिना पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की अनदेखी करने पर रोगी की आँख की रोशनी तक जा सकती है। 
कैसे लाएं इस रोग को काबू में..?
मधुमेह या डाइबिटीज को नियत्रण में नहीं रखा गया तो यह कालातर में आँखों की रेटिना [आंख का पर्दा] पर दुष्प्रभाव डालती है। मधुमेह से गुर्र्दो, तत्रिकाओं [न‌र्व्स] व शरीर के अन्य अंगों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से अनेक लोग अवगत हैं, लेकिन इस रोग के आखों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से बहुत कम लोग वाकिफ हैं। डाइबिटिक रेटिनोपैथी एक ऐसा रोग है, जिसमें आँख की रेटिना पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव की अनदेखी की गयी, तो इस मर्ज में आँख की रोशनी तक जा सकती है।
रोग का स्वरूप
डाइबिटिक रेटिनोपैथी के प्रतिकूल प्रभाव से रेटिना की छोटी रक्त वाहिकाएं [स्माल ब्लड वेसेल्स] कमजोर हो जाती हैं और इनके मूल स्वरूप में बदलाव हो जाता है। रक्त वाहिकाओं में सूजन आ सकती है, रक्तवाहिकाओं से रक्तस्राव होने लगता है या फिर इन रक्त वाहिकाओं में ब्रश की तरह की कई शाखाएं सी विकसित हो जाती हैं। इस स्थिति में रेटिना को स्वस्थ रखने के लिए ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति में बाधा पड़ती है।
लक्षण
शुरुआती दौर में डाइबिटिक रेटिनोपैथी के लक्षण सामान्य तौर पर प्रकट नहीं होते, लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है,वैसे-वैसे दृष्टि में धुंधलापन आने लगता है। अगर समुचित इलाज नहीं किया गया, तो अचानक आँख की रोशनी चली जाती है।
याद रखें
* गर्भावस्था में डाइबिटिक रेटिनोपैथी की समस्या बढ़ जाती है।
* उच्च रक्तचाप [हाई ब्लडप्रेशर] इस रोग की स्थिति को गभीर बना देता है।
* बचपन या किशोरावस्था में मधुमेह से ग्रस्त होने वाले बच्चों व किशोरों में यह मर्ज युवावस्था मे भी हो सकता है।
इलाज
डाइबिटिक रेटिनोपैथी का इलाज दो विधियों से किया जाता है
1. लेजर से उपचार: इसे ‘लेजर फोटोकोएगुलेशन’ भी कहते हैं, जिसका ज्यादातर मामलों में इस्तेमाल किया जाता है। मधुमेह से ग्रस्त जिन रोगियों की आँखों की रोशनी के जाने या उनकी दृष्टि के क्षीण होने का जोखिम होता है, उनमें इस उपचार विधि का प्रयोग किया जाता है। इस सदर्भ में यह बात याद रखी जानी चाहिए कि लेजर उपचार का प्रमुख उद्देश्य दृष्टि के मौजूदा स्तर को बरकरार रखकर उसे सुरक्षित रखना है, दृष्टि को बेहतर बनाना नहीं। रक्त वाहिकाओं [ब्लड वेसल्स] में लीकेज होने से रेटिना में सूजन आ जाती है। इस लीकेज को बंद करने के लिए इस विधि का इस्तेमाल किया जाता है। यदि नेत्रों में नई रक्तवाहिकाएं विकसित होने लगती हैं, तो उस स्थिति में पैन रेटिनल फोटोकोएगुलेशन [पीआरपी] तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। बहरहाल लेजर तकनीक से सामान्य तौर पर कारगर लाभ मिलने में तीन से चार महीने का वक्त लगता है।
2  वीट्रेक्टॅमी: कभी-कभी नई रक्त वाहिकाओं [ब्लड वैसल्स] से आँख के मध्य भाग में जेली की तरह रक्तस्राव होने लगता है। इस स्थिति को ‘वीट्रीअॅस हेमरेज’ कहते हैं, जिसके कारण दृष्टि की अचानक क्षति हो जाती है। अगर ‘वीट्रीअॅस हेमरेज’ बना रहता है, तब वीट्रेक्टॅमी की प्रक्रिया की जाती है। यह सूक्ष्म सर्जिकल प्रक्रिया है। जिसके माध्यम से आँख के मध्य से रक्त और दागदार ऊतकों [टिश्यूज] को हटाया जाता है।
कब बढ़ता है खतरा
मधुमेह की अवधि के बढ़ने के साथ इस रोग के होने की आशकाएं बढ़ती जाती हैं। फिर भी ऐसा देखा गया है कि 80 फीसदी लोग जो लगभग पिछले 15 सालों से अधिक वक्त से मधुमेह से ग्रस्त हैं, उनकी रेटिना की रक्त वाहिकाओं में कोई न कोई विकार [डिफेक्ट] आ जाता है। 
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6 टिप्पणियाँ

Posted by on दिसम्बर 14, 2011 in बिना श्रेणी

 

6 responses to “डाइबिटिक रेटिनोपैथी हल्के में लेना पड़ेगा भारी

  1. रश्मि प्रभा...

    दिसम्बर 14, 2011 at 9:47 अपराह्न

    is jaankari se bahut logon ko laabh hoga

     
  2. प्रवीण पाण्डेय

    दिसम्बर 14, 2011 at 9:57 अपराह्न

    मधुमेह में बीमारियाँ और गहराने लगती हैं, जानकारी पूर्ण आलेख।

     
  3. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    दिसम्बर 14, 2011 at 11:22 अपराह्न

    अच्छी जानकारी!!

     
  4. Ratan Singh Shekhawat

    दिसम्बर 15, 2011 at 8:31 पूर्वाह्न

    उपयोगी जानकारी

    Gyan Darpan
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  5. बी एस पाबला BS Pabla

    दिसम्बर 15, 2011 at 11:20 पूर्वाह्न

    मधुमेह में तो खास ख्याल रखना होता है आँखों का भी

    जानकारीपरक आलेख

     
  6. डॉ टी एस दराल

    दिसम्बर 15, 2011 at 9:32 अपराह्न

    सही जानकारी दी है सभी को ।
    लेजर से इलाज तो संभव है लेकिन बचाव में ही भलाई है । शिवम् अब ठीक चल रहा है । आभार ।

     

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