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महान गायक भूपेन हजारिका का निधन

05 नवम्बर
विस्तार है अपार, प्रजा दोनो पार, करे हाहाकार, निःशब्द सदा, ओ गंगा तुम, ओ गंगा तुम. .. ओ गंगा… बहती हो क्यूँ . .. . . . 
नैतिकता नष्ट हुई, मानवता भ्रष्ट हुई, निर्लज्ज भाव से बहती हो क्यूँ. . . . 
इतिहास की पुकार, करे हुंकार, ओ गंगा की धार, निर्बल जन को सबल संग्रामी, समग्रगामी. . बनाती नही हो क्यूँ. . . . 
विस्तार है अपार, प्रजा दोनो पार, करे हाहाकार, निःशब्द सदा, ओ गंगा तुम, ओ गंगा तुम. .. ओ गंगा… बहती हो क्यूँ . .. 
अनपढ़ जन अक्षरहीन अनगिन जन खाद्यविहीन निद्रवीन देख मौन हो क्यूँ ?
इतिहास की पुकार, करे हुंकार, ओ गंगा की धार, निर्बल जन को सबल संग्रामी, समग्रगामी. . बनाती नही हो क्यूँ. . . . 
विस्तार है अपार, प्रजा दोनो पार, करे हाहाकार, निःशब्द सदा, ओ गंगा तुम, ओ गंगा तुम. .. ओ गंगा… बहती हो क्यूँ . ..
व्यक्ति रहित व्यक्ति केन्द्रित सकल समाज व्यक्तित्व रहित निष्प्राण समाज को छोडती न क्यूँ ?
इतिहास की पुकार, करे हुंकार, ओ गंगा की धार, निर्बल जन को सबल संग्रामी, समग्रगामी. . बनाती नही हो क्यूँ. . . . 
विस्तार है अपार, प्रजा दोनो पार, करे हाहाकार, निःशब्द सदा, ओ गंगा तुम, ओ गंगा तुम. .. ओ गंगा… बहती हो क्यूँ . ..
रुतस्विनी क्यूँ न रही ? तुम निश्चय चितन नहीं प्राणों में प्रेरणा प्रेरती न क्यूँ ?
इतिहास की पुकार, करे हुंकार, ओ गंगा की धार, निर्बल जन को सबल संग्रामी, समग्रगामी. . बनाती नही हो क्यूँ. . . . 
विस्तार है अपार, प्रजा दोनो पार, करे हाहाकार, निःशब्द सदा, ओ गंगा तुम, ओ गंगा तुम. .. ओ गंगा… बहती हो क्यूँ . ..
उन्मद अवनी कुरुक्षेत्र बनी गंगे जननी नव भारत में भीष्म रूपी सूत समरजयी जनती नहीं हो क्यूँ ?
इतिहास की पुकार, करे हुंकार, ओ गंगा की धार, निर्बल जन को सबल संग्रामी, समग्रगामी. . बनाती नही हो क्यूँ. . . . 
विस्तार है अपार, प्रजा दोनो पार, करे हाहाकार, निःशब्द सदा, ओ गंगा तुम, ओ गंगा तुम. .. ओ गंगा… बहती हो क्यूँ . ..
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महान गायक भूपेन हजारिका नहीं रहे। मुंबई के एक अस्पताल में शनिवार को उनका निधन हो गया। हजारिका पिछले काफी समय से बीमार थे और यहां अस्पताल में भर्ती थे।  


आपको सभी मैनपुरी वासियों की ओर से शत शत नमन और विनम्र श्रद्धांजलि ! 
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3 टिप्पणियाँ

Posted by on नवम्बर 5, 2011 in बिना श्रेणी

 

3 responses to “महान गायक भूपेन हजारिका का निधन

  1. प्रवीण पाण्डेय

    नवम्बर 5, 2011 at 6:58 अपराह्न

    दुखद, गंगा से सभ्यता के बारे में प्रश्न पूछने वाला चला गया।

     
  2. देव कुमार झा

    नवम्बर 5, 2011 at 11:48 अपराह्न

    जबसे सुना है मन दुखी है….. एक अजीब सा खाली पन हो गया सा लग रहा है……

     
  3. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    नवम्बर 6, 2011 at 12:12 पूर्वाह्न

    उत्तर-पूर्व के ब्रह्मपुत्र की स्वरलहरी जो गंगा से मिलकर भारतवर्ष का स्वर बनी आज खामोश हो गयी!! एक युग का अंत!!

     

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