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अजीब या रोचक ??

07 सितम्बर
कल  राहुल सिंह जी  के ब्लॉग   पर इसे देख और पढ़ मैं चकरा गया शायद आपका भी यही हाल हो … पर है यह कमाल … न माने तो खुद ही अजमा लीजिये … पर हाँ अपनी राय देना न भूलियेगा !




“i cdnuolt blveiee taht I cluod aulaclty uesdnatnrd waht I was rdanieg. The phaonmneal pweor of the hmuan mnid, aoccdrnig to a rscheearch at Cmabrigde Uinervtisy, it dseno’t mtaetr in waht oerdr the ltteres in a wrod are, the olny iproamtnt tihng is taht the frsit and lsat ltteer be in the rghit pclae. The rset can be a taotl mses and you can sitll raed it whotuit a pboerlm. Tihs is bcuseae the huamn mnid deos not raed ervey lteter by istlef, but teh wrod as a wlohe. Azanmig huh? yaeh and I awlyas tghuhot slpeling was ipmorantt! can you raed tihs?”  
 

  हाँ जी … तो फिर क्या राय है आपकी …
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10 टिप्पणियाँ

Posted by on सितम्बर 7, 2011 in बिना श्रेणी

 

10 responses to “अजीब या रोचक ??

  1. ब्लॉ.ललित शर्मा

    सितम्बर 8, 2011 at 12:14 पूर्वाह्न

    🙂

     
  2. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    सितम्बर 8, 2011 at 12:19 पूर्वाह्न

    राहुल सिंह जी के यहाँ देखकर बस इंतज़ार में ही था.. मुझे पढ़ने में ज़रा भी दिक्कत नहीं हुई!!

     
  3. प्रवीण पाण्डेय

    सितम्बर 8, 2011 at 9:17 पूर्वाह्न

    पहले देख चुका हूँ, शब्द समुच्चय पढ़ते हैं हम एक बार में।

     
  4. प्रवीण पाण्डेय

    सितम्बर 8, 2011 at 9:17 पूर्वाह्न

    पहले देख चुका हूँ, शब्द समुच्चय पढ़ते हैं हम एक बार में।

     
  5. Shah Nawaz

    सितम्बर 8, 2011 at 9:24 पूर्वाह्न

    वाकई शब्द बड़े आराम से पढ़े जा रहे हैं… पहले-पहल लगा कि लिखने में गलती कर दी है है.. वो तो थोड़ी देर बाद पता चला कि सारे के सारे ही ऐसे लिखे हैं… और जानबूझकर लिखें हैं… 🙂

     
  6. सतीश सक्सेना

    सितम्बर 8, 2011 at 9:33 पूर्वाह्न

    आश्चर्यजनक जानकारी ….
    शुभकामनायें !

     
  7. shikha varshney

    सितम्बर 8, 2011 at 2:52 अपराह्न

    🙂 आराम से पढ़ा जा रहा है.

     
  8. Rahul Singh

    सितम्बर 8, 2011 at 2:54 अपराह्न

    यहां देख कर फिर से आनंदित हुआ, धन्‍यवाद.

     
  9. अजय कुमार झा

    सितम्बर 8, 2011 at 3:24 अपराह्न

    अरिस्स कोर्स नया होने के बावजूद और लिपि भी नया वर्जन होने के बावजूद हम भी पढ गए हो …..एक गजब का मनोविज्ञान महसूस हुआ कमाल है } बहुत बढिया प्रयोग है

     
  10. देवेन्द्र पाण्डेय

    सितम्बर 8, 2011 at 9:25 अपराह्न

    रोचक है। इसे देख कर तो लगता है कि भविष्य में अभिव्यक्ति, शब्द और व्याकरण के मानक उखाड़ फेंकेगी।

     

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