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‘नीला तारा’ हुआ २७ साल का …

06 जून

आज से ठीक २७ साल पहले अपने देश भारत की राजनीती के आकाश में जन्म था यह नीला तारा | यह नीला तारा अपने साथ इतनी उर्जा लिए था कि उस उर्जा से झुलसे लोग आज तक अपने घावों पर मरहम लगते नज़र आते है | और कुछ के घाव तो २७ सालो के बाद आज तक भरे भी नहीं है |

बहुत से सवाल आज तक उतर के इंतज़ार में है और अगर यही हाल रहा तो कल तक भूला भी दिए जायेगे क्यों यही होता आया है अपने देश में !

आज जरूरत है एक संकल्प की कि आगे भविष्य में कभी भी ऐसी नौबत नहीं आने दी जाएगी कि अपने देश में फिर कोई नीला तारा जन्म लें | और यह संकल्प लेना होगा हमारे नेतायों को …………और हमे भी |

जाने नीला तारा’ के विषय में |
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9 टिप्पणियाँ

Posted by on जून 6, 2011 in बिना श्रेणी

 

9 responses to “‘नीला तारा’ हुआ २७ साल का …

  1. डॉ टी एस दराल

    जून 6, 2011 at 2:49 अपराह्न

    इसे एक बुरा स्वपन समझ कर भुला देना ही बेहतर है । अच्छा है आगे की सोचें ।

     
  2. अमीत तोमर

    जून 6, 2011 at 5:26 अपराह्न

    भारत में एक बार फिर जलियावाला हत्याकांड दोराह्या गया हे जो इस भ्रष्ट सरकार ने ये करवाया हे । जो भाई बहिन वंहा नही थे । वो पूरी बात जानने के लिए इस साईट पर जाएं http://www.bharatyogi.net/2011/06/blog-post_05.html

     
  3. Shah Nawaz

    जून 6, 2011 at 7:02 अपराह्न

    डॉ दराल साहब की टिप्पणी से मैं भी पूरी तरह इत्तेफाक रखता हूँ…

     
  4. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)

    जून 6, 2011 at 8:03 अपराह्न

    आज तो टिप्पणी मे यही कहूँगा कि-

    दर्देदिल ग़ज़ल के मिसरों में उभर आया है
    खुश्क आँखों में समन्दर सा उतर आया है

     
  5. प्रवीण पाण्डेय

    जून 6, 2011 at 11:37 अपराह्न

    दुर्भाग्यपूर्ण इतिहास।

     
  6. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    जून 6, 2011 at 11:37 अपराह्न

    इस तरह की घटनाएं देश का इतिहास बनाती/बिगाड़ती रहती हैं…

     
  7. Smart Indian - स्मार्ट इंडियन

    जून 7, 2011 at 6:50 पूर्वाह्न

    भिडरांवाला ज़िन्दा होता तो शायद आज भी बसों से उतारकर धर्म के अनुसार अलग-अलग कतारों में खडे करके निर्दोष लोगों को भूना जा रहा होता। आज भी कनिष्क जैसे कई जहाज़ बम से उडाये जा रहे होते। “नीला तारा” और ऐसे अन्य ऑपरेशंस में भारतीय सेना और अर्ध-सैनिक बलों के वीर जवानों ने बहुत कुर्बानियाँ दी हैं। बेशक उनमें से बहुत से शहीद मैनपुरी के भी रहे होंगे।

     
  8. Babli

    जून 7, 2011 at 2:44 अपराह्न

    इस नीले तारे के बारे में न सोचना ही बेहतर है! हमें आगे बढ़ते जाना चाहिए!

     
  9. संजय भास्कर

    जुलाई 10, 2011 at 1:20 अपराह्न

    ….इतिहास गवाह है

     

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