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एक रिपोस्ट :- आओ महाराज ………. आप भी लटको !!

03 मार्च
आज कल ब्लॉग्गिंग जगत में एक प्रचालन हो गया है कि आप मुझे गाली दो मैं आपको गाली देता हूँ !! एसा करने वाले इसको गाली गाली” खेलना कहते है | बात एक दुसरे तक रहे तब तक तो ठीक है, कि भाई दो लोग है आपस में ‘गाली गाली’ खेल रहे है ………अपना क्या खेलने दो !! पर नहीं साहब एसे कैसे जब तक बात का बतंगड़ ना बने क्या मज्जा आया ??
तो क्या होता है कि बात आपस की ना हो कर आगे जा कर सामाजिक बनती है ………….अब भी मज्जा नहीं आया तो क्या हुआ इसको एक धार्मिक रूप दे देते है ……….अब तो मज्जा आ के रहेगा ………………धर्मं एक एसा मुद्दा है जिस में सबको मज्जा आता है !!

कहते है ना , SEX SALES वैसे ही भारत में गुरु……….. धरम SALES” !! यह वह हेमाजी वाले धरम नहीं है यह हमारे वाला धर्मं है !! जिस के आगे हम सब भूल जाते है !! तो मामला जैसे ही धार्मिक होता है हम सब कुछ छोड़ छाड़ लग जाते बिना डीग्री की वकालत करने अपने अपने धर्म की ……………….मेरा बढ़िया………. तेरा घटिया …………..उसका तो और भी घटिया !! अब क्यों कि होता यह सब ब्लॉग जगत में है तो जो लोग ब्लॉग्गिंग करते है वही जान पाते है कि कहाँ – कहाँ, कितने, किस – किस धर्म के मोर्चा खोले बैठे है | बाकी दुनिया में तो, यहाँ पर सब शांति शांति हैवाला गाना बज रहा होता पर ब्लॉग जगत में घोर अशांति फैल चुकी होती है और हर कोई दुसरे की बजने पर अमादा रहता है !!

अब एसे माहौल में जब शाम को चिट्ठाजगत वालों की मेल आती है कि आज १५ या २५ नए ब्लोगों का टिपण्णी से स्वागत करें तो बताइए तो सही कि उन नए लोगो से क्या कहे ??

हमारे छोटे से दिमाग में तो यही आता है कि भैया, चिमगादर के घर आये हो…….. तो आओ तुम भी लटक लो जैसे हम लटके है !!

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17 टिप्पणियाँ

Posted by on मार्च 3, 2011 in बिना श्रेणी

 

17 responses to “एक रिपोस्ट :- आओ महाराज ………. आप भी लटको !!

  1. सतीश सक्सेना

    मार्च 3, 2011 at 8:52 अपराह्न

    हमें नहीं लटकना…. 🙂

     
  2. ललित शर्मा

    मार्च 3, 2011 at 8:59 अपराह्न

    लटक लिए भैया,
    जेहि बिधि राखे राम, तेही बि्धि रहिए।

     
  3. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    मार्च 3, 2011 at 9:04 अपराह्न

    उल्टा लटके हुये कैसे लगते होंगे!!!!

     
  4. राजीव तनेजा

    मार्च 3, 2011 at 9:05 अपराह्न

    चमगादड़ के घर आये हो…….. तो आओ तुम भी लटक लो जैसे हम लटके है…

    सही है!…मिल-बाँट के जैसे-तैसे गुज़ारा कर लेंगे…टू मुझ पर टिपियाईयो …मैं तेरी पे टिपियाऊँगा

     
  5. डॉ टी एस दराल

    मार्च 3, 2011 at 9:13 अपराह्न

    ब्लोगिंग में धर्म की बात करना अधर्म है ।

     
  6. राज भाटिय़ा

    मार्च 3, 2011 at 11:13 अपराह्न

    हमे लटना नही आता….

     
  7. GirishMukul

    मार्च 3, 2011 at 11:18 अपराह्न

    यानी सिर्फ़ ललित जी तैयार हैं
    वास्तव में चमगादड़ सीधी लटकती उनके अपने अनुमान संरचना के अनुसार वे सही हैं.

     
  8. GirishMukul

    मार्च 3, 2011 at 11:18 अपराह्न

    क्यों हम नियति का मज़ाक उड़ाएं

     
  9. GirishMukul

    मार्च 3, 2011 at 11:19 अपराह्न

    हमारी नज़र का उल्टा उनकी नज़र में सीधा है.

     
  10. GirishMukul

    मार्च 3, 2011 at 11:19 अपराह्न

    यानी हमको नज़रिया बदलना ही होगा

     
  11. अविनाश वाचस्पति

    मार्च 3, 2011 at 11:23 अपराह्न

    लो जी हम भी लटक लिए

     
  12. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)

    मार्च 4, 2011 at 7:38 पूर्वाह्न

    यही तो हमारी कल्चर है!

     
  13. anshumala

    मार्च 4, 2011 at 12:11 अपराह्न

    अब तो उलटा लटके साल हो गया यह सीधा है ही कौन |

     
  14. Sonal Rastogi

    मार्च 4, 2011 at 12:17 अपराह्न

    🙂

     
  15. सुशील बाकलीवाल

    मार्च 4, 2011 at 2:51 अपराह्न

    बढिया सलाह चमगादड वाली लटके रहो
    ज्यादा उन्नति करलो तो बैताल बन जाओ.

     
  16. lokendra singh rajput

    मार्च 5, 2011 at 12:49 पूर्वाह्न

    लटको साहब खूब लटको…

     
  17. निर्झर'नीर

    मार्च 5, 2011 at 3:30 अपराह्न

    भैया, चिमगादर के घर आये हो…….. तो आओ तुम भी लटक लो जैसे हम लटके है !!

    मुहावरा अच्छा है

     

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