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दीपावली पर विशेष रि पोस्ट

04 नवम्बर

जरा कल्पना कीजिये, मोमबत्ती, मिठाई व आतिशबाजी नहीं होते, तो हम दीवाली कैसे मनाते? इन तीन के बिना कितनी फीकी होती हमारी दीवाली । क्या दीवाली भी सामान्य त्योहारों की तरह ही बनकर नहीं रह जाती?
क्यों आप सोच में पड़ गए न!? चलो पता करते हैं इन तीन के बारे में कि वे सबसे पहले कब और कैसे आई? हमने कब जाना कि मिठाई जैसी कोई चीज है और आतिशबाजी या मोमबत्ती का प्रचलन किस तरह से शुरू हुआ? है न ये कुछ रोचक सवाल? ऐसे सवाल, जो शायद कभी आपके जेहन में न आए हों, पर अब इन्हें जानकर दीवाली के सेलिब्रेशन का मजा कुछ और बढ़ जाएगा।
[चीनी नहीं इंडियन साल्ट]
दीवाली पर मिठाइयों के साथ-साथ आपको चॉकलेट्स, टॉफियां भी उपहार में मिलती होंगी। पर चीनी के बिना ये चीजें होतीं क्या? शहद में यदि ये तैयार भी होती, तो शायद इसमें चीनी जैसा आनंद न होता।
चीनी पहली बार कब बनी? इसे जानने के पचड़े में हमें नहीं पड़ना, पर यह जरूर जान लें कि चीनी से पहले दुनिया ने शहद का प्रयोग किया। और जब चीनी का प्रयोग शुरू हुआ, तब यह महज दवाई के तौर पर इस्तेमाल होती थी। ग्रीक सभ्यता में चीनी सैकरोन कहलाती थी। भारत में चीनी मिलने के प्रमाण अन्य स्त्रोतों के अलावा, ग्रीक फिजिशियन डायोसोरिडस से भी मिला है। उन्होंने मध्यकाल में पंजाब क्षेत्र में मिलने वाली मीठे और सफेद नमक जैसी चीज को इंडियन साल्ट कहा था।
[आतिशबाजी का आविष्कार]
सही मायने में आतिशबाजी की परंपरा तब शुरू हुई, जब चीनियों ने बारूद का आविष्कार किया। वे इटली के व्यापारी मार्कोपोलो थे, जिन्हें चीन से यूरोप बारूद लाने का श्रेय दिया जाता है। धीरे-धीरे जब बारूद दुनिया भर में पॉपुलर हुआ, तो आतिशबाजी भी प्रत्येक उत्सव और त्योहारों का अंग बनने लगी। चीनी बौद्ध भिक्षु ली तियान को पटाखे का आविष्कारक मानते हैं। इस आविष्कारक को श्रद्धांजलि देने लिए ही वे हर वर्ष 18 अप्रैल के दिन को सेलिब्रेट करते हैं। यह जानना बड़ा रोचक है कि सदियों पहले लोग इन आवाजों के लिए हरे बांस का प्रयोग करते थे। चीन में किसी उत्सव या खास दिन को सेलिब्रेट करने के लिए लोग ढेर सारे हरे बांस के गट्ठर को आग में झोंककर दूर हट जाते और इसके थोड़ी देर बाद ही जोरदार धमाके का लुत्फ उठाते थे। बहरहाल, अभी जो आप लोग आतिशबाजी से रंग-बिरंगी रोशनी का आनंद लेते हो, पहले यह नहीं था। केवल नारंगी रंग की रोशनी ही हरे बांस के गट्ठर के जलने के दौरान नजर आती थी। वे इटली के रसायन विज्ञानी थे, जिन्होंने आतिशबाजी को रंगीन बनाया। दरअसल, इन्होंने ही लाल, हरे, नीले और पीले रंग पैदा करने वाले रसायन की खोज की। ये रसायन थे क्रमश: स्ट्रांशियम , बेरियम , कॉपर (नीला) और सोडियम (पीला)।
जब पोटाशियम क्लोरेट, बेरियम और स्ट्रांशियम नाइट्रेट जैसे रसायन के आविष्कार हुए, तब भारत में भी कई आतिशबाजी कंपनियां आई और पटाखों का उत्पादन तेजी से शुरू हुआ। इनमें स्टैंडर्ड फायरव‌र्क्स लिमिटेड, शिवकाशी एक ब्रांड नेम है। आज कोरिया, इंडोनेशिया, जापान के पटाखे भी आपको बाजार में मिल जाएंगे। बटरफ्लाई, स्पिनव्हील्स, फ्लॉवर पॉट्स इन खास आतिशबाजियों के नाम हैं। इनमें से कई ऐसे हैं, जिनको जलाने के लिए चिंगारी की नहीं, रिमोट की जरूरत पड़ती है।
[चर्बी से मोम तक]
प्राचीन सभ्यताओं में जानवरों के खाल की वसा और कीट पतंगों से मिले मोम को पेपर ट्यूब्स में डालकर मोमबत्ती बनाने के प्रमाण हैं। अमेरिकी कैंडल फिश नामक तैलीय मछली का उपयोग मोमबत्ती जैसी चीज बनाने के लिए करते थे। जब पैराफिन का आविष्कार हुआ, तब से चर्बी के प्रयोग की परंपरा बिल्कुल बंद हो गई।
कहते हैं मधुमक्खी के छत्ते से मोम बनाने की शुरुआत तेरहवीं सदी में हुई। इस पेशे में रहने वाले लोग घूम-घूमकर अपने कस्टमर की डिमांड के अनुसार चर्बी वाली या मधुमक्खी के छत्ते से मिले मोम से बनी मोमबत्ती बेचते थे। फिर स्टीरिक एसिड (मोम को कड़ा करने वाला केमिकल) और गुंथी हुई बातियों का इस्तेमाल होने के बाद मोमबत्ती ने नया स्वरूप ग्रहण किया। आज कई तरह की डिजाइनर मोमबत्तियां आ गई हैं। ऑयल कैंडल, फ्रेगरेंस वाली कैंडल और न जाने कितने प्रकार के कैंडल्स आप मार्केट में देख सकते हैं ।
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क्यों कि अब सब साधन मौजूद है चलिए दीवाली मानते है !

आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं !
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13 टिप्पणियाँ

Posted by on नवम्बर 4, 2010 in बिना श्रेणी

 

13 responses to “दीपावली पर विशेष रि पोस्ट

  1. आशीष मिश्रा

    नवम्बर 4, 2010 at 3:14 अपराह्न

    हा हा अच्छा है हमारे पास सभी साधन हैं
    आपको भी सपरिवार दिपोत्सव की ढेरों शुभकामनाएँ
    मेरी पहली लघु कहानी पढ़ने के लिये आप सरोवर पर सादर आमंत्रित हैं

     
  2. Sonal Rastogi

    नवम्बर 4, 2010 at 3:25 अपराह्न

    दीपावली की आपको और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं

     
  3. anshumala

    नवम्बर 4, 2010 at 3:59 अपराह्न

    वाह दिवाली पर क्या अच्छी जानकारी दी है |

    आप को दिवाली की ढेर सारी शुभकामनाए |

     
  4. Akhtar Khan Akela

    नवम्बर 4, 2010 at 4:31 अपराह्न

    shi khaa hr tyohaar pr jaan or bejaan chizon ki apni ahmiyt hoti he jo aapne vistrt rup se byaan kr di he bhut khub mubark ho pehli achchi post ki mubark bad dusri dipavli ki mubarkbaad. akhtar khan akela kota rajsthan

     
  5. सतीश सक्सेना

    नवम्बर 4, 2010 at 4:38 अपराह्न

    बढ़िया जानकारी दी है आपने ! दीवाली की शुभकामनायें !

     
  6. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)

    नवम्बर 4, 2010 at 6:26 अपराह्न

    बहुत उपयोगी पोस्ट हैं!

    प्रेम से करना “गजानन-लक्ष्मी” आराधना।
    आज होनी चाहिए “माँ शारदे” की साधना।।

    अपने मन में इक दिया नन्हा जलाना ज्ञान का।
    उर से सारा तम हटाना, आज सब अज्ञान का।।

    आप खुशियों से धरा को जगमगाएँ!
    दीप-उत्सव पर बहुत शुभ-कामनाएँ!!

     
  7. ललित शर्मा

    नवम्बर 4, 2010 at 6:57 अपराह्न

    बढिया जानकारी शिवम भाई

    सभी को दीपावली की ढेर सारी बधाई एवं शुभकामनाएं

     
  8. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    नवम्बर 4, 2010 at 7:26 अपराह्न

    कमाल की जनकारी निकाली है आपने शिवम बाबू! सही अर्थों में एक अनोखी पोस्ट!

     
  9. राज भाटिय़ा

    नवम्बर 4, 2010 at 9:51 अपराह्न

    आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामाएं

     
  10. lokendra singh rajput

    नवम्बर 4, 2010 at 10:59 अपराह्न

    अच्छी जानकारी………
    आपको और आपके परिवार में सभी को दीपावली की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं.

     
  11. honesty project democracy

    नवम्बर 5, 2010 at 9:24 पूर्वाह्न

    आप सभी को खासकर इमानदार इंसान बनने के लिए संघर्षरत लोगों को दीपावली की हार्दिक बधाई और शुभकामनायें….

     
  12. अजय कुमार

    नवम्बर 5, 2010 at 10:43 पूर्वाह्न

    प्रदूषण मुक्त दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें

     
  13. पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

    नवम्बर 5, 2010 at 2:36 अपराह्न

    मिश्र जी आपको, आपके परिवार और आपके सभी पाठकों को दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाएं ….

     

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