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करो चापलूसी………मगर ध्यान से !!

06 अक्टूबर

यह नजारा है पश्चिम बंगाल में मेदिनीपुर जिले के खड़गपुर का। बुधवार को यहां केंद्रीय रेल मंत्री ममता बनर्जी को आना है। उन्हीं के स्वागत में उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने यह द्वार बनवाया है। इसमें उनके बांग्ला के प्रचलित नाम ममता बंधोपाध्याय के आगे श्रीमती जोड़ दिया गया, जबकि ममता अविवाहित है !

अब ऐसे में तो यही कहा जायेगा ना …..करो चापलूसी………मगर ध्यान से !!
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13 टिप्पणियाँ

Posted by on अक्टूबर 6, 2010 in बिना श्रेणी

 

13 responses to “करो चापलूसी………मगर ध्यान से !!

  1. परमजीत सिँह बाली

    अक्टूबर 6, 2010 at 3:34 अपराह्न

    sahi kahaa….:)

     
  2. anshumala

    अक्टूबर 6, 2010 at 3:34 अपराह्न

    हम लोग तो उस देश में रहते है जहा पर चापलूसी करते हुए लोग नेताओ को भगवान के रूप में प्रदर्शित कर देते है वो भी सोच समझ कर जानबूझ कर यहाँ तो बस गलती से कि गई गलती है |

     
  3. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    अक्टूबर 6, 2010 at 8:50 अपराह्न

    सिवम बाबू… अरे आप तो कलकतिया हैं..बंगाल में सुश्री नहीं होता है.. स्रीमती होता है.. महारास्ट्र में भी देखिए… स्रीमती लता मंगेसकर को जन्मदिन का बधाई लिखता है लोग..ऊ भी अबिबाहित हैं!!!

     
  4. राज भाटिय़ा

    अक्टूबर 6, 2010 at 9:05 अपराह्न

    अब क्या कहे जी, इस चापलुसी ने इस देश का सत्यनाश कर दिया हे

     
  5. शिवम् मिश्रा

    अक्टूबर 6, 2010 at 9:29 अपराह्न

    सलिल भाई ,
    'श्रीमती' तो किसी भी हालत में नहीं लिखा जा सकता … हाँ … कुमारी का प्रयोग हो सकता है ! मेरी कलकत्ता भी बात हुयी थी वहाँ से भी यहीं पता चला |हाँ एक कारण यह भी हो सकता है ….कि ममता जी की उम्र काफी है इस लिए शायद 'कुमारी' ना लिखा गया हो नहीं तो आम तौर पर 'श्रीमती' केवल विवाहित महिलाओ के नाम के आगे ही लगाया जाता है !

     
  6. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    अक्टूबर 6, 2010 at 9:42 अपराह्न

    सिवम बाबू , जहाँ से भी आपको ये जानकारी मिला है, हमरे हिसाब से गलत है. उमर का तो कोनो सम्बंध नहीं है..जब ऊ जुबा कॉन्ग्रेस की नेत्री थीं तब से उनके नाम के आगे वहाँ श्रीमती लगाया जाता रहा है…

     
  7. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    अक्टूबर 6, 2010 at 9:48 अपराह्न

    तमिलनाडु में भी जयललिता के नाम के आगे तिरुमति (श्रीमती का तमिल रूप)लिखते हैं… हिंदी पट्टी को छोड़कर यह प्रचलन मेरे संज्ञान में कहीं नहीं है, कम से कम तीन प्रदेश के बारे में जो हम जानते हैं…

     
  8. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    अक्टूबर 6, 2010 at 9:55 अपराह्न

    सिवम बाबू, देखिये एगो मराठी ब्लॉग का प्रस्तावना…

    लताबाई' हे याच पुस्तकातलं श्रीमती लता मंगेशकरांचं व्यक्तिचित्र. या दोन उत्तुंग व्यक्तिमत्त्वांतलं जिव्हाळ्याचं नातं समोर आणणारं. शांताबाईंनी लतादीदींबद्दल लिहिलेला हा सुंदर लेख लतादीदींच्या सहस्रचंद्रदर्शनसोहळ्यानिमित्त पुनर्प्रकाशित करत आहोत.

     
  9. शिवम् मिश्रा

    अक्टूबर 6, 2010 at 9:59 अपराह्न

    सलिल भाई ,
    मज़ा आ गया …. कम से कम इसी बहाने इतनी जानकारी तो मिली ! आपका बहुत बहुत आभार !

     
  10. Smart Indian - स्मार्ट इंडियन

    अक्टूबर 7, 2010 at 4:43 पूर्वाह्न

    सलिल जी की बात सोलह आने सही है। श्रीमती सर्वमान्य है, इसका विवाह से कोई सम्बन्ध नहीं है। ब्लॉग जगत में इस पर पहले भी चर्चायें हो चुकी हैं।

     
  11. Udan Tashtari

    अक्टूबर 7, 2010 at 8:10 पूर्वाह्न

    बताओ भला…ऐसी भी भूल हो जाती है…

     
  12. संगीता स्वरुप ( गीत )

    अक्टूबर 7, 2010 at 10:23 पूर्वाह्न

    इस बहाने नयी जानकारी मिली ….

     
  13. खुशदीप सहगल

    अक्टूबर 7, 2010 at 11:51 पूर्वाह्न

    इस जहां की यही रीत है…

    शिवम नेताओं के नाम पर चालीसा, मंदिर, दुर्गा-कृष्ण-राम की तरह दिखाने से तो ये भूल कहीं प्यारी है…

    सुश्री तो सुना था सभी महिलाओं के नाम के साथ लगाया जा सकता है, श्रीमती लगाना आज मुझे भी पहली बार पता
    चला है…

    और ये चाटुकारिता की तौलन प्रतियोगिता तो हर जगह चलती है…ब्लॉगिंग भी इससे अछूती नहीं है…

    जय हिंद…

     

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