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एक माइक्रो पोस्ट :- चल तू खैनी घिस !!

29 सितम्बर

रहेमु बोला नत्था से …… पहले २४ ….फिर २८ और अब ३० …??
नत्था बोला ……अरे हम को क्या ……..चल तू खैनी घिस !!
हम कौन से नेता है जो इन सब की फ़िक्र करें …
ना मैं मंदिर जाता …..ना तू जावे मज्जिद !!
रात को बच्चे भूखे ना सोये …. 
अपनी ‘उस’ से बस इतनी प्रीत !! 
रहेमु बोला सही कहता है ….
ले थोड़ी खैनी तू भी घिस !!
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19 टिप्पणियाँ

Posted by on सितम्बर 29, 2010 in बिना श्रेणी

 

19 responses to “एक माइक्रो पोस्ट :- चल तू खैनी घिस !!

  1. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)

    सितम्बर 29, 2010 at 4:19 अपराह्न

    तू तो गधा कुम्हार का
    तुझे राम से क्या काम?

     
  2. M VERMA

    सितम्बर 29, 2010 at 4:22 अपराह्न

    रहेमु और् नत्था को क्या फर्क पड़ता है … उन्हें तो फुर्सत ही नहीं रोटी की चिंता से

     
  3. अन्तर सोहिल

    सितम्बर 29, 2010 at 5:59 अपराह्न

    शानदार
    मैं भी रहेमु और नत्था में से एक ही हूँ जी।
    ज्यादातर जनता क्या सोचती है इस विवाद पर आपने चार लाईनों में बता दिया।
    बहुत बढिया

    प्रणाम स्वीकार करें

     
  4. Babli

    सितम्बर 29, 2010 at 6:15 अपराह्न

    बहुत अच्छा लिखा है आपने! कुछ अलग सा और शानदार पोस्ट रहा ये आपका!

     
  5. Sonal Rastogi

    सितम्बर 29, 2010 at 6:17 अपराह्न

    बहुत बढ़िया

     
  6. anshumala

    सितम्बर 29, 2010 at 6:37 अपराह्न

    आम आदमी घिसने और घिसाने के आलावा क्या कर सकता है

     
  7. निर्मला कपिला

    सितम्बर 29, 2010 at 9:29 अपराह्न

    रहेमु और नत्था बडे स्याने हैं जी । बडिया पोस्ट।

     
  8. राज भाटिय़ा

    सितम्बर 29, 2010 at 9:41 अपराह्न

    मै यकीन के संग कह सकता हुं कि ९०% लोग वो चाहे हिंदु हो या मुस्लिम उन्हे इस बात से इस फ़ेसले से कोई मतलब नही, सब शंति चाहते है, आपस मे मेल मिलाप चाह्ते है, आप ने दो लाईनो मै सच्चाई लिख दी, धन्यवाद

     
  9. देव कुमार झा

    सितम्बर 29, 2010 at 11:03 अपराह्न

    भई छोटी है मगर है दमदार….

     
  10. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    सितम्बर 29, 2010 at 11:35 अपराह्न

    विचारणीय!!

     
  11. संगीता पुरी

    सितम्बर 30, 2010 at 12:09 पूर्वाह्न

    कम शब्‍दों में बडी बात .. गजब का लिखा है!!

     
  12. गिरीश बिल्लोरे

    सितम्बर 30, 2010 at 1:08 पूर्वाह्न

    आज़ की सबसे समझदार वाली पोस्ट

     
  13. पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

    सितम्बर 30, 2010 at 3:05 पूर्वाह्न

    बेचारे चैनी घिसने के इलावा ओर कर भी क्या सकते हैं…..

     
  14. Udan Tashtari

    सितम्बर 30, 2010 at 6:35 पूर्वाह्न

    खैनी घिस !!..बस, और कर भी क्या सकते हैं.

     
  15. महफूज़ अली

    सितम्बर 30, 2010 at 8:56 पूर्वाह्न

    बहुत ही बढ़िया… लिखा है…. हमें भी सिर्फ खैनी घिसने से ही मतलब है….

     
  16. संगीता स्वरुप ( गीत )

    सितम्बर 30, 2010 at 1:21 अपराह्न

    बिकुल सटीक …रोटी की चिन्ता में कैसा मंदिर और कैसी मस्जिद

     
  17. दिगम्बर नासवा

    सितम्बर 30, 2010 at 2:42 अपराह्न

    बात यहा तक ही रहे तो अच्छा है पर ये दोनो ही नेताओं के बहकाने पर मरने मारने पर उतारू हो जाएँगे ….

     
  18. DEEPAK BABA

    सितम्बर 30, 2010 at 3:11 अपराह्न

    बहुते बढिया,

    चल बाबा – तू भी खैनी घीस

     

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