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धूम्रपान :- एक कार्य महान !! (व्यंग्य)

25 अगस्त
धूम्रपान
एक कार्य महान

सिगरेट
है संजीवनी
पीकर
स्वास्थ्य बनाओ

समय
से पहले बूढ़े होकर
रियायतों
का लाभ उठाओ

सिगरेट
पीकर ही
हैरी और माइकल निकलते हैं

दूध
और फल खाकर तो
हरगोपाल
बनते हैं

जो
नहीं पीते उन्हें
इस
सुख से अवगत कराओ

बस में रेल में घर में जेल में
सिगरेट
सुलगाओ

अगर
पैसे कम हैं
फिर
भी काम चला लो

जरूरी
नहीं है सिगरेट
कभी कभी बीड़ी सुलगा लो

बीड़ी
सफलता की सीढ़ी
इस
पर चढ़ते चले जाओ

मेहनत
की कमाई
सही
काम में लगाओ

जो
हड्डियां गलाते हैं
वो
तपस्वी कहलाते हैं


कलयुग के दधीचि
हड्डियों
के साथ करो
फेफड़े
और गुर्दे भी कुर्बान

क्योंकि
धूम्रपान
एक कार्य महान ||

(एक मित्र ने ऑरकुट पर यह राय दी थी….सोचा आप ही क्यों वंचित रहे !) 
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12 टिप्पणियाँ

Posted by on अगस्त 25, 2010 in बिना श्रेणी

 

12 responses to “धूम्रपान :- एक कार्य महान !! (व्यंग्य)

  1. ललित शर्मा-للت شرما

    अगस्त 25, 2010 at 1:41 अपराह्न

    हा हा हा
    बहुत सारे कलयुग के दधिची इसी तरह तैयार हो रहे हैं।
    लेकिन इन सड़ी-गली हड्डियों का वज्र कैसे बनेगा यह चिंतनीय है।

    आभार
    धांसु पोस्ट है भाई

     
  2. Babli

    अगस्त 25, 2010 at 1:41 अपराह्न

    मेहनत
    की कमाई
    सही
    काम में लगाओ..
    आपने बिल्कुल सही लिखा है! लोग ये जानते हुए भी इस बुरी आदत को छोड़ नहीं पाते! सिगरेट पीना सेहत के लिय सिर्फ़ हानिकारक ही नहीं बल्कि पैसे की भी बर्बादी है! आपने बहुत सुन्दरता से व्यंग्य किया है! आखिर लोग क्यूँ अपने आप को मार देना चाहते है इस भयानक नशा के वजह से ये समझ में नहीं आता !

     
  3. राजीव तनेजा

    अगस्त 25, 2010 at 1:45 अपराह्न

    बहुत ही बढ़िया..व्यग्यात्मक कविता

     
  4. गौतम राजरिशी

    अगस्त 25, 2010 at 2:01 अपराह्न

    मुस्कुरा रहा हूँ पढ़कर कि होंठों में इस वक्त यही संजीवनी सुलगी हुई है। क्या करें शिवम भाई…समय से पहले बूढ़े होने की तमन्ना बलवती होती जाती है हर बीतते समय के साथ।
    🙂

     
  5. संगीता पुरी

    अगस्त 25, 2010 at 2:06 अपराह्न

    जय हों !!

     
  6. सतीश सक्सेना

    अगस्त 25, 2010 at 2:49 अपराह्न

    सिगरेट पीना बंद करो, बंद करो बंद करो
    धुआं फैलाना बंद करो बंद करो बंद करो
    सिगरट बाजी नहीं चलेगी ….नहीं चलेगी नहीं चलेगी
    अपने बच्चे याद करो …याद करो याद करो

    ऐसा ही कुछ करते हैं शिवम् भाई …मेजर गौतम राजरिशी का पता तो मालुम करो ….अगर बढ़िया लोग भी इसको संजीवनी कहेंगे तो हमें नारे लगाने ही पड़ेंगे !

     
  7. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

    अगस्त 25, 2010 at 3:54 अपराह्न

    बहुत बढ़िया पोस्ट!

    सही नसीहत दी है!

     
  8. शेफाली पाण्डे

    अगस्त 25, 2010 at 9:04 अपराह्न

    vaah, achchhe sujhaav hain …

     
  9. मनोज कुमार

    अगस्त 25, 2010 at 11:45 अपराह्न

    बहुत सुंदर प्रस्तुति।
    इस व्यंग्य से शायद कुछ लोगों की आंखें खुल जाए।

     
  10. Udan Tashtari

    अगस्त 26, 2010 at 7:37 पूर्वाह्न

    सटीक कटाक्ष है..इस बन्धन से मुक्त हुए ५ बरस से ज्यादा हुए अब!!

     
  11. अशोक बजाज

    अगस्त 26, 2010 at 10:10 पूर्वाह्न

    बहुत अच्छी प्रस्तुति—आभार

     
  12. Mithilesh dubey

    अगस्त 26, 2010 at 11:03 पूर्वाह्न

    बहुत सही ।

     

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