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एक माइक्रो पोस्ट :- एक दिमागी कसरत !!

21 अगस्त
ज़रा बताइए यह शख्स आखिर कर क्या रहा है ??
जवाब कल की पोस्ट में मिलेगा ……..तब तक आप लोग अपने अपने दिमागी घोड़े भगाइए !! 
( चित्र के साथ कोई भी कलाकारी नहीं की गयी है )
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16 टिप्पणियाँ

Posted by on अगस्त 21, 2010 in बिना श्रेणी

 

16 responses to “एक माइक्रो पोस्ट :- एक दिमागी कसरत !!

  1. महफूज़ अली

    अगस्त 21, 2010 at 3:36 अपराह्न

    यह फूस छहा रहा है…. बस फूस थोडा modern है….

     
  2. Babli

    अगस्त 21, 2010 at 3:41 अपराह्न

    मेरे ख्याल से ये आदमी ट्रक से गेहूं उतार रहा है!

     
  3. अन्तर सोहिल

    अगस्त 21, 2010 at 3:58 अपराह्न

    हम तो नहीं जान पाये जी, अब कल की पोस्ट का इंतजार रहेगा।
    क्या फोटो में कुछ कलाकारी भी की हुई है?

    ये उतार तो कुछ नहीं रहा, क्योंकि ये बैठा हुआ है।
    श्री महफूज जी की बात में कुछ दम दिख रहा है।

    प्रणाम स्वीकार करें

     
  4. VICHAAR SHOONYA

    अगस्त 21, 2010 at 4:33 अपराह्न

    शिवम् भाई कसरत दिमागी हो या शारीरिक आपने बस की कभी नहीं रही…….अपन तो बस कल की पोस्ट का इंतजार करेंगे…….

     
  5. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    अगस्त 21, 2010 at 4:50 अपराह्न

    पता त हम भी नहीं लगा पाते..लेकिन आज अख़बार में देख लिए थे इसीलिए बता सकते हैं कि ई लखनऊ में सेवई बनाने का दृश्य है..ठीक बोले ना??

     
  6. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    अगस्त 21, 2010 at 4:51 अपराह्न

    हमरा जवबवा रोक लीजिएगा…सब हो जाने के बाद देखाइएगा..नहीं तो लोग समझ जाएगा…

     
  7. Coral

    अगस्त 21, 2010 at 5:40 अपराह्न

    महफुस जी ने सही कहा है… बस फूस थोड़ी computerised है !

     
  8. Mahak

    अगस्त 21, 2010 at 7:05 अपराह्न

    मुझे भी इसका जवाब नहीं पता लग रहा है इसलिए कल की पोस्ट का ही इन्तेज़ार रहेगा , वैसे बबली जी का उत्तर मुझे सही लग रहा है लेकिन आपको एक बात और बतानी चाहिए की क्या इस चित्र में कंप्यूटर effects का भी प्रयोग हुआ है ?

     
  9. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

    अगस्त 21, 2010 at 8:16 अपराह्न

    आपको पता है!

    हमें क्यों कष्ट देते हो?

     
  10. ललित शर्मा-للت شرما

    अगस्त 21, 2010 at 11:48 अपराह्न

    बाजा बजा रहा है।
    गाना सुना रहा है।

     
  11. पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

    अगस्त 22, 2010 at 12:04 पूर्वाह्न

    हमारे ख्याल से तो ये बन्दा खपरैल बाँधने में जुटा है…..बाकी राम जाने या आप 🙂

     
  12. राज भाटिय़ा

    अगस्त 22, 2010 at 1:33 पूर्वाह्न

    बेचारा गरीब अपनी झोपडी की छत को कस के बांधने मै मदद कर रहा है जी अपने साथियो की

     
  13. संजय भास्कर

    अगस्त 22, 2010 at 8:34 पूर्वाह्न

    बेचारा गरीब अपनी झोपडी की छत को कस के बांधने मै मदद कर रहा है जी अपने साथियो की

     
  14. संजय भास्कर

    अगस्त 22, 2010 at 8:35 पूर्वाह्न

    महफूज जी की बात में कुछ दम दिख रहा है।

     
  15. VICHAAR SHOONYA

    अगस्त 22, 2010 at 12:00 अपराह्न

    shivam din bit gaya ab to javab de do.

     
  16. abhi

    सितम्बर 12, 2010 at 10:24 पूर्वाह्न

    चचा जी तो बताइए दिए जवाब 🙂

     

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