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एक रिपोस्ट – ..और धोती पहनने लगे नौजवान – खुदीराम बोस के बलिदान दिवस पर विशेष

10 अगस्त

आजादी की लड़ाई का इतिहास क्रांतिकारियों के त्याग और बलिदान के अनगिनत कारनामों से भरा पड़ा है। क्रांतिकारियों की सूची में ऐसा ही एक नाम है खुदीराम बोस का, जो शहादत के बादइतने लोकप्रिय हो गए कि नौजवान एक खास किस्म की धोती पहनने लगे जिनकी किनारी पर खुदीराम लिखा होता था!

कुछ इतिहासकार उन्हें देश के लिए फांसी पर चढ़ने वाला सबसे कम उम्र का देशभक्त मानते हैं। खुदीराम का जन्म तीन दिसंबर 1889 को पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में त्रैलोक्यनाथ बोस के घर हुआ था। खुदीराम को आजादी हासिल करने की ऐसी लगन लगी कि नौवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़कर वह स्वदेशी आंदोलन में कूद पड़े। इसके बाद वह रिवोल्यूशनरी पार्टी के सदस्य बने और वंदेमातरम लिखे पर्चे वितरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में चले आंदोलन में भी उन्होंने बढ़ चढ़ कर भाग लिया। उनकी क्रांतिकारी गतिविधियों के चलते 28 फरवरी 1906 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन वह कैद से भाग निकले। लगभग दो महीने बाद अप्रैल में वह फिर से पकड़े गए। 16 मई 1906 को उन्हें रिहा कर दिया गया।
छह दिसंबर 1907 को खुदीराम ने नारायणगढ़ रेलवे स्टेशन पर बंगाल के गवर्नर की विशेष ट्रेन पर हमला किया, परंतु गवर्नर बच गया। सन 1908 में खुदीराम ने दो अंग्रेज अधिकारियों वाट्सन और पैम्फायल्ट फुलर पर बम से हमला किया, लेकिन वे भी बच निकले।
खुदीराम बोस मुजफ्फरपुर के सेशन जज किंग्सफोर्ड से बेहद खफा थे जिसने बंगाल के कई देशभक्तों को कड़ी सजा दी थी। उन्होंने अपने साथी प्रफुल चंद चाकी के साथ मिलकर किंग्सफोर्ड को सबक सिखाने की ठानी। दोनों मुजफ्फरपुर आए और 30 अप्रैल 1908 को सेशन जज की गाड़ी पर बम फेंक दिया, लेकिन उस गाड़ी में उस समय सेशन जज की जगह उसकी परिचित दो यूरोपीय महिलाएं कैनेडी और उसकी बेटी सवार थीं। किंग्सफोर्ड के धोखे में दोनों महिलाएं मारी गईं जिसका खुदीराम और प्रफुल चंद चाकी को काफी अफसोस हुआ।
अंग्रेज पुलिस उनके पीछे लगी और वैनी रेलवे स्टेशन पर उन्हें घेर लिया। अपने को पुलिस से घिरा देख प्रफुल चंद चाकी ने खुद को गोली से उड़ा लिया, जबकि खुदीराम पकड़े गए। मुजफ्फरपुर जेल में 11 अगस्त 1908 को उन्हें फांसी पर लटका दिया गया। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 19 साल थी। देश के लिए शहादत देने के बाद खुदीराम इतने लोकप्रिय हो गए कि बंगाल के जुलाहे एक खास किस्म की धोती बुनने लगे।
इतिहासवेत्ता शिरोल ने लिखा है कि बंगाल के राष्ट्रवादियों के लिए वह वीर शहीद और अनुकरणीय हो गया। विद्यार्थियों तथा अन्य लोगों ने शोक मनाया। कई दिन तक स्कूल बंद रहे और नौजवान ऐसी धोती पहनने लगे जिनकी किनारी पर खुदीराम लिखा होता था।
आप को सभी मैनपुरी वासियों का शत शत नमन |
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10 टिप्पणियाँ

Posted by on अगस्त 10, 2010 in बिना श्रेणी

 

10 responses to “एक रिपोस्ट – ..और धोती पहनने लगे नौजवान – खुदीराम बोस के बलिदान दिवस पर विशेष

  1. मनोज कुमार

    अगस्त 11, 2010 at 12:13 पूर्वाह्न

    खुदीराम बोस को शत शत नमन |

     
  2. abhi

    अगस्त 11, 2010 at 9:11 पूर्वाह्न

    अच्छी जानकारी दी आपने खुदीराम बोस के बारे में..

     
  3. ललित शर्मा

    अगस्त 11, 2010 at 9:12 पूर्वाह्न

     
  4. Smart Indian - स्मार्ट इंडियन

    अगस्त 11, 2010 at 9:59 पूर्वाह्न

    अमर शहीद खुदीराम बोस को नमन और श्रद्धांजलि!

     
  5. महेन्द्र मिश्र

    अगस्त 11, 2010 at 10:17 पूर्वाह्न

    खुदीराम जी बोस के बारे में उम्दा लेख ….

     
  6. Parul

    अगस्त 11, 2010 at 11:44 पूर्वाह्न

    chaliye koi to yaad karta hai un bhule huye logo ko..true tribute!

     
  7. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    अगस्त 11, 2010 at 4:40 अपराह्न

    शत नमन मेरा तुम्हें… वैसे भी इनका सम्बंध बिहार से बहुत घनिष्ठ है…इस क्रांतिकारी ने मुस्कुराते हुए मौत को गले लगाया था… और इस घटना पर काज़ी नज़रुल इस्लाम ने एक गीत भी लिखा था… महन शहीद के चरनों में नत्मस्तक हैं हम!!

     
  8. nilesh mathur

    अगस्त 11, 2010 at 8:19 अपराह्न

    अमर शहीद खुदीराम बोस को नमन और श्रद्धांजलि! और आपको धन्यवाद !

     
  9. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

    अगस्त 11, 2010 at 10:26 अपराह्न

    खुदीराम बोस को शत शत नमन करता हूँ|

     
  10. राज भाटिय़ा

    अगस्त 11, 2010 at 10:44 अपराह्न

    खुदीराम बोस को शत शत नमन | वेसे हम जेसे लोगो को कोई हक नही बनता इन्हे नमन करने का, इन लोगो ने खुदार बन कए हम सब के लिये आजादी ली ओर अपनी जाने देश पर नोछावर कर दी….. ओर आज हम सब क्या कर रहे है…..

     

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