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जय हो :- अब दुनिया में होगी अपने रुपये की पहचान !!

15 जुलाई

दुनिया भर में अब भारतीय मुद्रा की भी अपनी अलग पहचान होगी। अभी तक यह सम्मान सिर्फ चार देशों की मुद्राओं को ही प्राप्त है। लेकिन अब सरकार ने भारतीय रुपये को पहचान देते हुए इसके लिए एक प्रतीक चिन्ह या ‘सिंबल’ देने का ऐलान किया है। अमेरिकी डॉलर, ब्रिटेन के पौंड स्टर्लिग, जापानी येन और यूरोपीय संघ के यूरो के बाद रुपया पांचवी ऐसी मुद्रा बन गया है, जिसे उसके सिंबल से पहचाना जाएगा।

एक साथ देवनागरी के ‘र’ और रोमन के अक्षर ‘आर’ से मिलते जुलते इस प्रतीक चिन्ह [सिंबल] पर गुरुवार को कैबिनेट की मुहर लग गई। सरकार इस पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाने के लिए एक अभियान शुरू करेगी।

भारतीय रुपये की अलग पहचान बनाने की प्रक्रिया पिछले दो साल से चल रही थी। इसका ऐलान वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने अपने बजट भाषण में भी किया था। इसके लिए एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। इसके तहत सरकार को तीन हजार से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए थे। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर की अध्यक्षता में गठित एक उच्चस्तरीय समिति ने भारतीय संस्कृति के साथ ही आधुनिक युग के बेहतर सामंजस्य वाले इस प्रतीक को अंतिम तौर पर चयन करने की सिफारिश की थी। यह प्रतीक चिन्ह आईआईटी, गुवाहाटी के प्रोफेसर डी. उदय कुमार ने डिजाइन किया है।

कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर रुपये के प्रतीक को लागू करने में छह महीने का समय लग सकता है। जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस काम में 18 से 24 महीने का वक्त लगेगा। इसमें राज्यों का भी सहयोग लिया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे लागू करने के लिए आईएसओ, आईईसी 10646 और आईएस 13194 मानक के तहत पंजीयन कराया जाएगा। साथ ही दुनिया भर की लिपियों में शामिल करने के लिए ‘यूनिकोड स्टैंडर्ड’ में इसे शामिल किया जाएगा।

यूनिकोड स्टैंडर्ड में शामिल होने के बाद दुनिया भर की सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए इसका इस्तेमाल करना आसान हो जाएगा। इससे अभी जिस तरह से डॉलर का प्रतीक चिन्ह हर कंप्यूटर या की बोर्ड में होता है, उसी तरह से रुपये का प्रतीक चिन्ह भी इनका हिस्सा बन जाएगा। आईटी कंपनियों के संगठन नासकॉम से कहा गया है कि वह सॉफ्टवेयर विकसित करने वाली कंपनियों के साथ मिलकर कर इस प्रतीक चिन्ह को लोकप्रिय बनाए। जब तक की-बोर्ड पर इसे चिन्हित नहीं किया जाता है, तब तक कंपनियां अपने सॉफ्टवेयर में यह व्यवस्था करें कि इसे कंप्यूटर पर लिखा जा सके। अभी यूरो के प्रतीक चिन्ह के साथ भी ऐसा ही होता है।

प्रतीक चिन्ह का होना ग्लोबल अर्थंव्यवस्था में भारत के बढ़ते महत्व व आत्मविश्वास को बताता है। यह प्रतीक बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल व इंडोनेशिया में प्रचलित मुद्रा रुपये के सापेक्ष भारतीय मुद्रा को एक अलग पहचान देगा। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि इस प्रतीक चिन्ह का इस्तेमाल भारतीय करेंसी पर होगा या नहीं।

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9 टिप्पणियाँ

Posted by on जुलाई 15, 2010 in बिना श्रेणी

 

9 responses to “जय हो :- अब दुनिया में होगी अपने रुपये की पहचान !!

  1. सतीश सक्सेना

    जुलाई 15, 2010 at 9:48 अपराह्न

    बहुत दिनों से इंतज़ार था इस मुद्रा चिन्ह का ! शायद ब्लॉग जगत में इसे आपने पहली बार बताया है ! आपको शुभकामनायें !
    वैसे इसका लिखना आसान लगता है ..आसानी से लोगों में स्वीकार होगा !

     
  2. Mrs. Asha Joglekar

    जुलाई 15, 2010 at 10:32 अपराह्न

    वाह, अभिनन्दन ! रुपये का, भारत वासियों का और सरकार का आखिर रुपये को अंतराष्ट्रीय पहचान दिला ही दी । आपने ये जानकारी सबसे पहले दी इसलिये आपका भी ।

     
  3. राज भाटिय़ा

    जुलाई 15, 2010 at 11:22 अपराह्न

    :)धन्यवाद

     
  4. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    जुलाई 16, 2010 at 12:23 पूर्वाह्न

    जनता का यूं आई डी बनाने से पहिले रुपैया का कार्ड बन गया.. चली कोनों पहिचान तो मिला… ६ साल तक INR से काम चलाए हैं…अब ई पहिचान देख कर अच्छा लगा…

     
  5. ललित शर्मा

    जुलाई 16, 2010 at 12:38 पूर्वाह्न

    आज रुपए की पहचान हो गयी
    भारतवासियों की शान हो गयी

    बधाईयां जी बधाइयाँ

     
  6. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

    जुलाई 16, 2010 at 5:58 पूर्वाह्न

    लगे हाथों यह भी स्पष्ट कर ही देना था कि
    असली की या नकली की!

     
  7. Rangnath Singh

    जुलाई 16, 2010 at 6:04 पूर्वाह्न

    यह चिह्न सुंदर है। आपने अच्छी जानकारी दी है।

     
  8. महफूज़ अली

    जुलाई 16, 2010 at 11:25 अपराह्न

    यह हमारे लिए गर्व की बात है…

     
  9. डा.सुभाष राय

    जुलाई 17, 2010 at 12:36 पूर्वाह्न

    शिवम, बहुत अच्छी जानकारी। उदयकुमार जी के बारे में भी थोड़ी और जानकारी जुटा सको तो एक और रोचक पोस्ट हो सकेगी। इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही भारतीय मुद्रा के इतिहास में उनका नाम भी अमर हो गया है।

     

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