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रिपोस्ट :- अग्निपथ (ख़ास समीर लाल समीर जी के लिए)

14 मई

समीर भाई ,
बच्चन जी की यह कविता आप पर सटीक बैठती है सो पेश है ……………..

वृक्ष हो बड़े भले,
हो घने हो भले,
एक पत्र छाह भी मांग मत, मांग मत, मांग मत,
अग्निपथ, अग्निपथ अग्निपथ;

तू न थमेगा कभी तू न मुदेगा कभी तू न रुकेगा कभी,
कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ,
अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ.
ये महा दृश्य हैं,
चल रहा मनुष्य हैं,
अश्रु, स्वेत, रक्त से लथपथ लथपथ लथपथ ..
अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ.



– “बच्चन

————————————————————————————————–
आप बस युही हिंदी ब्लॉग जगत को मार्गदर्शित करते रहें …………यही दुआ है !!
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14 टिप्पणियाँ

Posted by on मई 14, 2010 in बिना श्रेणी

 

14 responses to “रिपोस्ट :- अग्निपथ (ख़ास समीर लाल समीर जी के लिए)

  1. ललित शर्मा

    मई 14, 2010 at 3:00 पूर्वाह्न

    बहुत बढिया

     
  2. Udan Tashtari

    मई 14, 2010 at 5:36 पूर्वाह्न

    आभार!!

    शपथ शपथ शपथ!!!

    🙂

     
  3. महेन्द्र मिश्र

    मई 14, 2010 at 6:07 पूर्वाह्न

    बहुत बढ़िया मिश्र जी …

     
  4. Suman

    मई 14, 2010 at 6:47 पूर्वाह्न

    nice

     
  5. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

    मई 14, 2010 at 7:38 पूर्वाह्न

    बहती हो जब जगत में सुन्दर सुखद समीर!
    शुद्ध होय वातावरण, बहता निर्मल नीर!

     
  6. मनोज कुमार

    मई 14, 2010 at 8:27 पूर्वाह्न

    अद्भुत। समयोचित। सटीक।

     
  7. अजय कुमार झा

    मई 14, 2010 at 5:48 अपराह्न

    बहुत ही बढिया शिवम भाई , बहुत ही उम्दा । आज के समय में सबसे सटीक

     
  8. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    मई 14, 2010 at 8:18 अपराह्न

    अच्छा उद्गार …

     
  9. Babli

    मई 14, 2010 at 10:09 अपराह्न

    वाह बहुत बढ़िया रचना! लाजवाब!

     
  10. राज भाटिय़ा

    मई 14, 2010 at 11:01 अपराह्न

    बहुत सुंदर जी

     
  11. Kumar Jaljala

    मई 15, 2010 at 12:18 पूर्वाह्न

    अब कुछ तो शर्म करो अनुप श्कुला ओर ज्ञनादद साहब.
    शुक्ला साहब आपने मुझसे फोन पर वादा किया था कि आप ब्लागिंग को छोड़कर हिल स्टेशन पर जा रहे है लंेकिन आपने वादा पूरा नहीं किया. आपका चेला सतीश सक्सेना तो दलाली करने का आरोप झेल नहीं पाया और विधेश ृभाग रहा है.

     
  12. पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

    मई 15, 2010 at 12:28 पूर्वाह्न

    बढिया! मन में उर्जा का संचार करती ये पंक्तियाँ…..

     
  13. AlbelaKhatri.com

    मई 15, 2010 at 12:59 पूर्वाह्न

    jai ho bhai……….

    bahut badhiya post

     
  14. देव कुमार झा

    मई 15, 2010 at 1:50 पूर्वाह्न

    वाह वाह…

    एक पत्र छाह भी मांग मत, मांग मत, मांग मत,
    अग्निपथ, अग्निपथ अग्निपथ;

    ले ली शपथ…. ले ली शपथ….

    यार वैसे बहुत कठिन है डगर ब्लाग्गर की….

     

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