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एक लघु कथा – रिंगटोन

10 मई

बेटा बहू गुस्से से पागल हो मां को धिक्कार रहे थे क्योंकि उनका छ: माह का बेटा रोते-रोते पलंग से गिर पड़ा था और मां उसका रोना नहीं सुन पाई थी॥ ग्लानि से भरी मेरी मां सब बर्दाश्त कर रही थी, क्योंकि उसे लगा था कि यह बहू का मोबाइल बज रहा है। अभी कल ही बहू ने उसके हड़बड़ाकर दौड़ने पर खिलखिलाते हुये कहा था मांजी मुन्ना नहीं ये रो रहा है.. उसके हाथ में उसका मोबाइल था। बच्चों के गुस्से पर मां बाजार को कोस रही थी कि आखिर और क्याक्या बिकेगा इस बाजार में..?

[लेखक :- डा. कमल मुसद्दी]
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10 टिप्पणियाँ

Posted by on मई 10, 2010 in बिना श्रेणी

 

10 responses to “एक लघु कथा – रिंगटोन

  1. Anonymous

    मई 10, 2010 at 12:40 अपराह्न

    font nahi dikh rha

     
  2. भंगार

    मई 10, 2010 at 1:40 अपराह्न

    अच्छा लिखा आप ने ,अब माँ भी बच्चों का रोना और
    रिंग टोन नहीं पहचान पा रही है ? माँ तो बच्चे के एहसास
    को मीलों से जान लेती है ….

     
  3. कुलवंत हैप्पी

    मई 10, 2010 at 5:07 अपराह्न

    वो बारिश में भी मेरे आंसू पहचान लेती थी, आखिर जो माँ

     
  4. मनोज कुमार

    मई 10, 2010 at 7:02 अपराह्न

    सच यही है।

     
  5. राज भाटिय़ा

    मई 10, 2010 at 8:51 अपराह्न

    बेटा बहू दोनो ही पागल है

     
  6. sangeeta swarup

    मई 10, 2010 at 9:21 अपराह्न

    सही कहा….आज कल ना जाने कौन कौन सी रिंगटोन्स बजती हैं…

     
  7. देव कुमार झा

    मई 11, 2010 at 12:08 पूर्वाह्न

    हा हा,
    कहानी नहीं यह तो हकीकत है भाई… बाज़ार है यहां सब कुछ बिकता है….

     
  8. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    मई 11, 2010 at 12:54 पूर्वाह्न

    एकदम ठीक बात लिखे हैं आप… सनीचर को एगो सोक सभा में गए थे हम लोग दूचार लोग… ऊ गम्मी का महौल में भी एगो भाई जी का रिंग बजने लगा, “ धूम मचा ले धूम..”
    तनी हमरो पढकर देखिए ..हमहूँ आज मोबाईल के बारे में लिखे हैं..

     
  9. खुशदीप सहगल

    मई 11, 2010 at 8:59 पूर्वाह्न

    बहू-बेटा पहले अपने दिमाग की रिंग-टोन ठीक कराएं…

    जय हिंद…

     
  10. Indranil Bhattacharjee ........."सैल"

    मई 11, 2010 at 11:19 पूर्वाह्न

    बात रिंग टोन कि नहीं है … सच में मानसिकता इस तरह बदल गयी है कि बडो कि इज्ज़त करना हम भूल चुके हैं … इंसान धीरे धीरे बदल रहा है ….

     

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