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एक खुला पत्र :- ‘लोकसंघर्ष’ वाले सुमन जी के नाम !!

01 मई


माननीय सुमन जी ,

नमस्कार !

आज अपनी पोस्ट पर जब आपका वही चिर परिचित कमेन्ट, “NICE”, देखा तो ठान लिया था कि आज आपसे यह विनती जरूर करुगा कि या तो अपने इस एक शब्द के कमेन्ट के पीछे छुपे राज़ का पर्दाफाश करे या कभी कभी थोडा कुछ और भी लिखा करे !

केवल मुझे ही नहीं आपकी यह अदा बहुतों कों सताती है , क्यों कि इस NICE के पीछे की बात समझ नहीं आती है !!
पोस्ट कोई भी हो, किसी भी विषय पर हो, किसी की भी हो …………………….मानना पड़ेगा ………….आपका कमेन्ट नहीं बदलता …………….वही ………………..”NICE” !!

आखिर यह NICE है क्या ??

जिज्ञासा बहुत है आपके इस NICE कों ले कर सो कृपया कर बतलाये !
मैं यहाँ स्पष्ट करना चाहुगा कि मैं आपको ईमेल भी कर सकता था पर जानबूझ कर यह पोस्ट लिख रहा हूँ क्यों कि आप यह कमेन्ट केवल मेरे कि ब्लॉग पर नहीं देते बल्कि लगभग हर एक ब्लॉग जो भी आप visit करते है उस पर आपका यही कमेन्ट देखा है !
मेरा इरादा किसी भी दृष्टि से आपके अपमान का नहीं है …………जैसा कि मैंने पहले ही कहा यह केवल एक जिज्ञासा है ! फिर भी अगर आपको मेरी कोई भी बात बुरी लगी हो तो मैं आपसे माफ़ी मांगता हूँ ……… आप मेरे बड़े है, आप जब चाहे बेहिचक एक डांट लगायें, आपको पूरा अधिकार है !

आपके जवाब का इंतज़ार रहेगा !

शुभकामनायो सहित
आपका
शिवम् मिश्रा

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38 टिप्पणियाँ

Posted by on मई 1, 2010 in बिना श्रेणी

 

38 responses to “एक खुला पत्र :- ‘लोकसंघर्ष’ वाले सुमन जी के नाम !!

  1. अविनाश वाचस्पति

    मई 2, 2010 at 12:46 पूर्वाह्न

    nice

     
  2. शिवम् मिश्रा

    मई 2, 2010 at 1:02 पूर्वाह्न

    अविनाश भाई,
    आप भी !
    एक और पोस्ट की तैयारी में लग जाऊ क्या ?

     
  3. अविनाश वाचस्पति

    मई 2, 2010 at 1:04 पूर्वाह्न

    स्‍वागत है

    nice

     
  4. वीनस केशरी

    मई 2, 2010 at 2:03 पूर्वाह्न

    आपने नाईस जी की मान्यताओं को ललकारा है मगर वो टूटने वाली नहीं है

    यहाँ भी आपको “नाईस” ही मिलेगा

    और अगर कुछ और मिला तो ये बड़ा अत्याचार होगा हमारे साथ जिसे आज तक “नाईस” ही मिला है और “नाईस जी” से “नाईस” के अलावा कुछ नहीं मिला

     
  5. पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

    मई 2, 2010 at 2:16 पूर्वाह्न

    super nice…

     
  6. Neeraj Rohilla

    मई 2, 2010 at 4:02 पूर्वाह्न

    Get over it…

    Blogs and comments…

     
  7. Suman

    मई 2, 2010 at 6:42 पूर्वाह्न

    nice

     
  8. ललित शर्मा

    मई 2, 2010 at 6:59 पूर्वाह्न

    ये ही है राईट च्वाईस-नाईस

     
  9. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

    मई 2, 2010 at 7:49 पूर्वाह्न

    NICE तो नाइस ही है बन्धुवर!
    मैंने उनसे बात की थी इस विषय में!
    वो बता रहे थे कि मैं विवादों से हमेशा दूर रहता हूँ!
    इसलिए केवल “नाइस” ही लिखता हूँ!
    नाइस आखिर कोई गाली तो नही है!
    NICE & VERY NICE.
    फिर नाइस लिखने में श्रम भी तो नही करना पड़ता!
    कमेंट का कमेंट और नाइस का नाइस!

     
  10. Ratan Singh Shekhawat

    मई 2, 2010 at 8:11 पूर्वाह्न

    अब बेचारों को हर चीज Nice लगती है तो Nice ही लिखेंगे ना !

    वैसे इन्हें पुलिसिया ख़बरें भी Nice लगती है पुलिस के खिलाफ पोस्ट लिखने के लिए !!

     
  11. डॉ टी एस दराल

    मई 2, 2010 at 10:12 पूर्वाह्न

    जानने की जिज्ञासा तो हमें भी है।

     
  12. कूप कृष्ण

    मई 2, 2010 at 10:57 पूर्वाह्न

    आपको राज जानने की पड़ी है।इनका राज बताया जाये तो यह उसे गंदी हरकत करार देते हैं।ललित शर्मा जी की पोस्ट http://lalitdotcom.blogspot.com/2010/04/10.html पर जब यह जाहिर हुया था कि सक्रिय ब्लोगो की लिस्ट मे यह स्ज्जन 9वे स्थान पर है तो इन्होने नाईस के बदले लिखा था Bad Herkat Hai. nice मतलब गंदी हरकत है यह!आज आप देखिये 25 दिनो मे ही यह जा चुके हैन 6ठे स्थान पर।महीने भर बाद यह पहले स्थान पर होन्गे।उडन तश्तरी से भी ऊपर!!!!!!!!!!अलेक्सा मे भी इनकी रैन्किग देख लो।तमाम सक्रिय ब्लोगो के सातह खडे हैं टॉप टेन में।इनका योगदान कितना हि ब्लोगिन्ग में सब जान्ते हैं
    आजकल यह NICE लिख कर मिटा भी देते हैं ताकि कमेंट की गिनती भी बढ जाये और किसी को दिखे भी ना कि क्या लिखा था।रैन्किन्ग मे ऊपर जाने के लिये एक ही पोस्ट को दस ब्लोगोन पर डाल देते हैं।महीने भर तक सभी पोस्टोन में नाईस लिख देना और रोज चार लाईन की पोस्ट को दस ब्लोगोन मे डाल देना रैन्किन्ग के गणित मेइन इनका क्या मतलब है आप जान्ते ही हो

    अब समझ में आया राज NICE का या और कुछ बताऊ,ण

     
  13. girish pankaj

    मई 2, 2010 at 1:15 अपराह्न

    nice…..

     
  14. HTF

    मई 2, 2010 at 3:02 अपराह्न

    जब कोई देशविरोधी छदमवेश में काम कर रहा हो तो वो अपनी असली देसविरोधी सोच को उजागर होने से बचाने के लिए छदम शब्दों का प्रयोग नहीं करेगा तो और क्या करेगा

     
  15. अजय कुमार झा

    मई 2, 2010 at 3:07 अपराह्न

    शिवम भाई ,
    आज आपने जो बात कही है वो पहले भी कई मित्र कह चुके हैं बेशक अलग अलग शैली में आज आपने सीधा ही उनसे पूछ कर ठीक ही किया । अभी तक उनका कोई जवाब नहीं आया तो थोडी से निराशा हुई है । वैसे तो इसका बेहतर और बिल्कुल ठीक थीक जवाब वे खुद ही दे सकेंगे , मगर एक बार सुना था कि किसी विवाद के बाद से उन्होंने ये नीति अपना ली थी । मगर फ़िर भी कम से कम कुछ पोस्टें तो निश्चित ही ऐसी नहीं होतीं जिनपर नाईस लिखना सर्वथा कई बार उन पोस्टों के अपमान जैसा हो जाता है इसलिए यदि सुमन जी नाईस लिखना जारी भी रखना चाहते हैं तो उन पोस्टों को जरूर ही बख्श देना चाहिए । वैसे हिंदी ब्लोगिगंग में इस अंग्रेजी nice को तो इन्होंने अमर बना दिया है । वैसे इंतजार है कि शायद वे कुछ तो कहें ही इस बार

     
  16. राज भाटिय़ा

    मई 2, 2010 at 3:40 अपराह्न

    NICE & VERY NICE.

     
  17. शिवम् मिश्रा

    मई 2, 2010 at 3:49 अपराह्न

    जवाब तो आया है अजय भाई, पर जवाब में भी “NICE” ही आया है !

     
  18. राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ

    मई 2, 2010 at 4:07 अपराह्न

    क्या कहने साहब
    जबाब नहीं
    प्रसंशनीय प्रस्तुति
    satguru-satykikhoj.blogspot.com

     
  19. Mithilesh dubey

    मई 2, 2010 at 4:17 अपराह्न

    गलत बात है भाई ।

     
  20. सत्यम न्यूज़

    मई 2, 2010 at 4:20 अपराह्न

    यह nice ………nice क्या है यह nice nice !!!???

     
  21. PD

    मई 2, 2010 at 4:21 अपराह्न

    niceजी very nice.. 🙂

     
  22. सतीश सक्सेना

    मई 2, 2010 at 7:00 अपराह्न

    nice !

     
  23. रवीन्द्र प्रभात

    मई 2, 2010 at 7:17 अपराह्न

    nice

     
  24. अविनाश वाचस्पति

    मई 2, 2010 at 7:21 अपराह्न

    एक तो nice में
    ice बर्फ है तो
    ठंडक रखें।

    जब ब्‍लॉग पर कोई पोस्‍ट लगे
    तो nice कहना जचता है
    कुछ को अच्‍छा लगता है
    कुछ को बिल्‍कुल नहीं जचता है

    इससे मालूम होता है कि पोस्‍ट पढ़ी गई है। न भी पढ़ी गई है तो खोली तो गई ही है और बिना खोले तो nice लिखना भी संभव नहीं है। वैसे एक साफ्टवेयर का विकास चल रहा है जिससे सिर्फ एक log in करके nice लिखकर सक्रिय किया जाएगा तो उस दिन की सभी ब्‍लॉग पोस्‍टों पर nice सिर्फ तीस तीस सैकेंड के अंतराल में लिखा नजर आएगा। उसमें शब्‍द बदलने की सुविधा भी होगी। nice की जगह हिन्‍दी में बेहतर, अच्‍छा, सुंदर या पसंद नहीं आया भी भरा जा सकता है। तीन शब्‍दों से बड़ी टिप्‍पणी उस स्‍वचालित साफ्टवेयर से सक्रिय नहीं की जा सकेगी। यह साफ्टवेयर बनाया जा रहा है और संभवत: अगले इस बरस दीपावली पर अथवा अगले बरस होली पर रिलीज हो जाएगा। पर कीमत होगी 1001/- रुपया एक बरस के लिए लाईसेंस सहित और इसकी पायरेटिड प्रति अवेलेबल नहीं होगी।

     
  25. श्यामल सुमन

    मई 2, 2010 at 8:14 अपराह्न

    nice का मतलब शायद यह हो कि – वे सबको एक नजर से देखते हैं। “सियाराममय सब जग जानी”

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    http://www.manoramsuman.blogspot.com

     
  26. डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

    मई 2, 2010 at 8:45 अपराह्न

    nice
    ===============================
    हमें तो लगता है की सुमन जी ने NICE के कई फुल फॉर्म खोज रखे हैं. जैसी पोस्ट होती है वे तो उसी के अनुसार अंदाज़ लगा कर nice लिख देते हैं, समझो आप.
    अब आपने उनके नाम खुला पात्र लिखा है तो इतना और निवेदन कर लीजिये की वे nice के सारे अर्थ हम सभी को बता दें.
    जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड

     
  27. Indranil Bhattacharjee ........."सैल"

    मई 2, 2010 at 9:05 अपराह्न

    ये सवाल मेरे दिमाग में भी आया था … पर मैंने सोचा छोडो इस बात को …

     
  28. Ratan Singh Shekhawat

    मई 2, 2010 at 11:33 अपराह्न

    इस पोस्ट पर भी सुमन जी ने Nice के बारे में बताने के बजाय Nice ही टिप दिया है

     
  29. हरि शर्मा

    मई 2, 2010 at 11:44 अपराह्न

    `NICE

     
  30. खुशदीप सहगल

    मई 2, 2010 at 11:51 अपराह्न

    अरे शिवम भाई, बस इतनी सी बात के लिए आप हैरान परेशान हो…नाइस बाबा की महानता पर तो मैं फरवरी में पूरी पोस्ट लिख चुका हूं…आपके लिए दोहरा देता हूं…

    आप कहेंगे कि ये तो सुना था कि यही है राइट च्वायस बेबी…लेकिन ये क्या…यही है NICE च्वायस बाबा…क्यों सिर्फ पेप्सी के लिए ही कह सकते हैं कि यही है राइट च्वायस बेबी…पेप्सी तो पराए घर की है…और क्या उसने पेटेंट कराया हुआ है…नहीं भैया पेटेंट तो किसी और ने कराया है…और वो है खालिस भारतीय सिद्धपुरुष…दिल थाम कर बैठिए, सुनने के लिए कि किसने पेटेंट कराया है और क्यों पेटेंट कराया है…ये हैं अपने नाइस (NICE) बाबा…

    ये बाबा सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठे हुए हैं…दुख-सुख, जीवन-मरण…ये सभी को निर्विकार भाव से लेते हैं…न सावन हरे, न भादो सूखे…लेकिन इनके अविष्कार किए हुए एक मंत्र NICE का संसार के तुच्छ प्राणी इतना अमानवीय प्रयोग कर रहे हैं कि बाबा का क्रोध से त्रिनेत्र खुल गया है….बस किसी भी घड़ी NICE बाबा का तांडव शुरू हो सकता है..

    .ऐसा नहीं कि NICE बाबा को आधुनिक नियम-क़ानूनों का पता न हो…बाबा ने रात-रात जाग कर और अमेरिकी वकीलों से सलाह लेकर अपने मंत्र NICE को पेटेंट करा लिया…इसलिए पहले ही आगाह कर देता हूं कि अगर कोई सज्जन इस पोस्ट पर अब तक NICE कमेंट करने की सोच रहा है तो अंजाम भुगतने के लिए खुद ही ज़िम्मेदार होगा…इधर आपने NICE लिखा नहीं कि ऑटोमेटेड तकनीक से आपका नाम अमेरिका के पेटेंट डिपार्टमेंट के पास पहुंच जाएगा…फिर आपको पहले अफगानिस्तान-पाकिस्तान की सीमा पर स्थित पहाड़ियों की किसी कंदरा में पहुंचाया जाएगा…और ऊपर से ड्रोन आप पर अचूक निशाना लगाने के लिए आकाश में विचरण करते रहेंगे…अब बताइए कभी लिखेंगे किसी को कमेंट में NICE, VERY NICE…लेंगे NICE बाबा से पंगा…

    अगर उस पोस्ट का कमेंट्स के साथ आनंद लेना है तो लिंक भी दे देता हूं…

    http://deshnama.blogspot.com/2010/02/nice.html

    जय हिंद…

     
  31. सत्यम न्यूज़

    मई 2, 2010 at 11:53 अपराह्न

    यार, यह मसला तो किसी सास-बहु सीरियल की तरह बड़ता ही जा रहा है ! इतने कमेंट्स तो शिवम् भाई, अपने ब्लॉग को कभी भी नहीं मिले !! यह चक्कर क्या है यार ??
    nice ने कर दिया वैरी – वैरी nice !!
    बधाइयाँ !!

     
  32. शिवम् मिश्रा

    मई 3, 2010 at 12:08 पूर्वाह्न

    खुशदीप भाई,
    मुझे पता नहीं था आपकी पोस्ट के बारे में क्यों कि दिसम्बर से १२ अप्रैल तक मैं ब्लॉग्गिंग से दूर था !

     
  33. मनोज कुमार

    मई 3, 2010 at 12:10 पूर्वाह्न

    नाइस!

     
  34. Babli

    मई 3, 2010 at 12:17 पूर्वाह्न

    Nice कमेन्ट बिल्कुल भी बुरा नहीं है बल्कि इसका मतलब “अच्छा है” पर हर किसीके लिए सिर्फ़ एक ही शब्द में हमेशा टिपण्णी देने पर लोगों के मन में ये जिज्ञासा आयी है आखिर सिर्फ़ Nice ही क्यूँ?

     
  35. शिवम् मिश्रा

    मई 3, 2010 at 12:27 पूर्वाह्न

    हिर्देश भाई, मैं खुद हैरान हूँ कि आज यह क्या हुआ है ………… हम लोगो ने एक से बढ़िया एक पोस्ट लगाई पर कभी भी कोई फर्क नहीं पड़ा किसी को आज इस एक पोस्ट पर लोगो का 'प्यार' तो देखो !! निंदा रस कितना महान होता है आज जाना !!

     
  36. खुशदीप सहगल

    मई 3, 2010 at 12:46 पूर्वाह्न

    शिवम भाई,
    अब तो मान गए न नाइस बाबा के प्रताप को…मैं तो हमेशा कहता हूं ये साधारण पुरुष नहीं कोई महान आत्मा हैं जो इनसानों को नाइस का प्रसाद बांटती रहती है…

    जय हिंद…

     
  37. शिवम् मिश्रा

    मई 3, 2010 at 1:07 पूर्वाह्न

    मान गए जी बिलकुल मान गए !!
    जय nice बाबा की !!

     
  38. चला बिहारी ब्लॉगर बनने

    मई 3, 2010 at 1:27 पूर्वाह्न

    शिवम बाबू ! सुमन जी का एतना पीछा करने के बाद भी आप पिछुआ गये.. देखिए आपसे पहले त हम जान गये एक बेजोड़ रहस्य… सुमन जी दू दिन कबल एल.बी.ए. के एक पोस्ट में नाईस लिखकर आए थे. बदला में उनसे एगो सज्जन पूछिए दिए कि ई नाइस आप पोस्ट के लिए लिखे हैं कि फोटो के लिए.. त तुरते उनका जवाब आया फोटो के लिए.. हमरे लिए त ई ऐतिहासिक पल था. हम भी चट ऊ सज्जन का एह्सान माने, अऊर मिठाइयो खिलाने का वादा किए जो सुमन जी के मुँह से दोसरा बात बोलवा दिया.

     

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