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आखिर क्या होती है एक बढ़िया पोस्ट ??

01 मई
क्या होती है एक बढ़िया पोस्ट ??

वह पोस्ट जिसमे की किसी और की बुराईभलाई हो ;


वह पोस्ट जिसमे किसी धर्मं की बुराईभलाई हो ;


वह पोस्ट जो मसालेदार हो, किसी आइटम नंबर की तरह ;

आखिर क्या होती है एक बढ़िया पोस्ट ??

आप सब सोचते होगे यह आज इसको क्या हुआ ?

तो साहब हुआ यह कि कल अपने दुसरे ब्लॉग जागो सोने वालो …” पर यह पोस्ट लगाई थी, मुद्दा गंभीर था और हम सब से जुड़ा हुआ था !
पर अभी जब मैं यह लिख रहा हूँ तब तक ब्लागवाणी के अनुसार उस पोस्ट कों १४ लोगो ने पढ़ा है और २ ने पसंद का चटका भी लगाया है पर जो बात मुझे सब से जयादा अखर रही है वह यह कि सिवाए एक के किसी ने भी उस पोस्ट पर कोई भी टिपण्णी नहीं की !!

क्यों यह समझ नहीं पाया !

आप सब से निवेदन है कि मेरी दुविधा कों शांत करे – क्या मैंने गलत मुद्दा उठाया ?? क्या सच में हम लोग अभी इतने mature नहीं हो पाए है कि एसे मुद्दों पर अपनी राय दे पाए ! एसा क्या गलत था उस पोस्ट में ??

यहाँ यह बता दू कि मैं अपनी पोस्ट के लिए दुखी नहीं हूँ …………..मुझे दुःख है इस बात का कि एक आहम मुद्दे पर एसी बेरुखी क्यों रही ?? जब हम लोग अपने अपने ब्लॉग के मार्फ़त अलग अलग मुद्दों कि बात करते है तो मैंने क्या गलत किया ??

कृपया मेरी जिज्ञासा शांत करे !

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5 टिप्पणियाँ

Posted by on मई 1, 2010 in बिना श्रेणी

 

5 responses to “आखिर क्या होती है एक बढ़िया पोस्ट ??

  1. Suman

    मई 1, 2010 at 9:09 अपराह्न

    nice

     
  2. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

    मई 1, 2010 at 9:58 अपराह्न

    सत्य का बोध कराती पोस्ट!

     
  3. varsha

    मई 1, 2010 at 10:35 अपराह्न

    baat sahi hai aapki..100 feesadi sach ki parivaar niyojan striyaan hi apnati hain shayad isliye ki ve seedhe prabhavit hoti hain.
    raha sawal comments ka to ve kai karnon se kayee baar nahin mil paate.aapke comment ke liye shukriya.

     
  4. शिवम् मिश्रा

    मई 1, 2010 at 11:15 अपराह्न

    वर्षा जी, आपकी राय के लिए धन्यवाद ! पर बात कमेंट्स की नहीं सोच की है ! इस सोच का क्या करे जो इसे मुद्दों पर कमेंट्स करने से भी रोकती है तो पहल क्या खाक करवाएगी !?

     
  5. yugal mehra

    मई 2, 2010 at 8:25 पूर्वाह्न

    आप लिखते रहीये . हम है ना पढने के लिये.
    टिप्पणीयाँ मुझे भी बहुत पसन्द है. और टिप्पणीयाँ देनी ही चाहिए.. छोटी ही सही. पर कोई ना भी दे तो क्या. बस लिखते रहिए. लोग पढते तो है.
    टिप्पणी न करने के कई कारण हो सकते हैं
    हिन्दी में टाईप करना कठिन है
    शायद आपकी बात इतनी सटीक हो कि किसी टिप्पणी की जरूरत न हो
    कुछ समय की कमी हो
    आलस भी लगता है
    निराश मत होइये, बाकी लोग भी टिप्पणी करेंगे

    हो ओ ओ ओ ओ ….
    पढ के तेरा बिलाग (ब्लाग),
    टिप्पणी देने को कोई हो ना हो तैय्यार,
    चल चला चल,
    हो लिखता,
    चल चला चल,
    चल चला चल,
    हो लिखता,
    चल चला चल.

     

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