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मंद पड़ रही आडियो कैसेट की धुन

25 अप्रैल

संगीत का लुत्फ लेने के लिए पहले लोग कैसेट खरीदते थे। लेकिन अब उनकी लोकप्रियता लगभग समाप्त हो चुकी है। कैसेट की जगह एमपीथ्री के रूप में आने वाली सीडी ने ले ली है। फायदा यह कि एक सीडी में कैसेट की तुलना में कहीं अधिक गाने आते है।

संगीत के क्षेत्र में आई इस क्रांति ने आडियो कैसेट की दुनिया को लगभग खत्म कर दिया है। ऐसा सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में हो रहा है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2005 में दुनिया भर में 90 करोड़ कैसेट बिके थे। यह संगीत के क्षेत्र में 54 फीसदी हिस्सेदारी थी। फिर लगातार इसमें गिरावट आती गई। आज आडियो कैसेट या तो बनते नहीं है या फिर संगीत स्टोर में धूल फांकते रहते है।

देश की सबसे बड़ी म्यूजिक कंपनी टी-सीरीज के प्रबंध निदेशक भूषण कुमार का कहना है, ‘कैसेट व्यवसाय लगभग खत्म हो चुका है। अब तो लोग इसके बारे में बात भी नहीं करना चाहते।’ टिप्स के कुमार तौरानी भी भूषण से सहमत है। वह कहते है, ‘कुछ साल पहले तक हम हर साल 4.5 करोड़ कैसेट जारी किया करते थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर 10 लाख रह गई है।’

रिटेल चेन ‘प्लेनेट एम’ के प्रवक्ता के मुताबिक आडियो कैसेटों को रखने के लिए ज्यादा जगह की जरूरत होती है जबकि उतनी जगह में तीन सीडी आराम से आ जाती हैं। बड़े शहरों में लोग लोग इंटरनेट रेडियो, आई-पाड और आन लाइन संगीत का लुत्फ उठा रहे है। आडियो कैसेट लांग प्लेइंग रिका‌र्ड्स [एलपी] की तरह बीते दिनों की बात होते जा रहे है। आलम यह है कि बड़े संगीत स्टोर आडियो कैसेट रखते भी नहीं है। यही कारण है कि कैसेट बनाने वाली कंपनियों ने भी इसका उत्पादन कम कर दिया है।

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4 टिप्पणियाँ

Posted by on अप्रैल 25, 2010 in बिना श्रेणी

 

4 responses to “मंद पड़ रही आडियो कैसेट की धुन

  1. अजय कुमार झा

    अप्रैल 25, 2010 at 9:28 अपराह्न

    नई तकनीक और नए यंत्रों के आने से पुराने आऊटडेटेड यंत्रों की उपेक्षा और उनकी दु्र्द्शा का ही ये एक उदाहरण है , बहुत ही अलग विषय को छुआ आपने , बढिया लगा

     
  2. राज भाटिय़ा

    अप्रैल 25, 2010 at 10:02 अपराह्न

    अजी अब सीडी ओर डी वी डी भी धीरे धीरे कम हो रही है, नई से नई तकनीक आ रही है, मेरे पास कई केसेड पडी है, लेकिन फ़ेकंने के पेसे लगते है इस लिये एक एक कर के फ़ेंक रहा हुं, आप ने बहुत अच्छी जानकारी दी, कई बार सोचा इस बारे लिखे –
    धन्यवाद

     
  3. Manoj

    अप्रैल 26, 2010 at 12:23 अपराह्न

    ओहो आपंने तो हद कर दी बार बार जागरण के समाचार उठा कर पोस्ट बना देते है थोडा बद्ल तो लेते महोदय कही ऐसा न हो किसी दिन दैनिक जागरण वाले आप पर केस कर दें. वैसे अगर आपके साथ ऐसा होने वाला ही हैं.

     
  4. शिवम् मिश्रा

    अप्रैल 26, 2010 at 3:12 अपराह्न

    मनोज जी , धन्यवाद इस जरूरी मुद्दे पर मेरा ध्यान दिलाने के लिए ! सच में कभी इस विषय में सोचा ही नहीं ! हमेशा जो खुद पढ़ा सोचा आप सब कों भी पढाया जाये सो लगा दी पोस्ट ! आगे से खबर कों अपने शब्दों में लिखा करुगा !
    क्यों ठीक है ना ! एक बार फिर धन्यवाद !

     

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