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मोहे अपने ही रंग मैं रंग दे

28 फरवरी
देख बहारें होली की

होली को दुनिया का सबसे क्रिएटिव पर्व कह सकते हैं.जितनी वेरायटी इस पर्व में नज़र आती है इतनी शायद किसी और में नही है……यूँ तो होली के रंग मैं कई रंग है.होली का अपना एक दर्शन है.जिसमें खुशी है …..मोहब्बत हैं……. शरारत है…..और तो और इसमें अध्यात्म भी है.यही कारण है कि होली के रंग और ढंग पर बहुत कुछ लिखा गया.मथुरा से लेकर मुल्तान तक होली के रंग दिखाई देते हैं.मैनपुरी चूँकि ब्रज प्रान्त का ही एक हिस्सा है.इस कारण होली यहाँ का बेहद खास पर्व माना जाता है.मैनपुरी की सीमा से लगे एटा जनपद में हज़रत अमीर खुसरो का जन्म हुआ था.होली को नया रंगों देने हज़रत अमीर खुसरो का खास योगदान है.होली को सूफियाना रंगों मैं रगने का काम खुसरो ने ही किया…….
मोहे अपने ही रंग मैं रंग दे
तू तो साहिब मेरा महबूब इलाही
हमारी चुनरिया पिया की पयरिया वो तो दोनों बसंती रंग दे
जो तो मांगे रंग की रंगाई मोरा जोबन गिरबी रख ले
आन परी दरवार तिहारे
मोरी लाज शर्म सब ले
मोहे अपने ही रंग मैं रंग दे
हज़रत अमीर खुसरो ने होली को परमात्मा से जोड़दिया .खुसरो यहाँ अपने मुर्शिद यानि खुदा से कह रहे है की मुझे अपने ही रंग मैं रंग दो..होली की खासियत ये है की दुनिया का ये सबसे सस्ता और अनूठा पर्व है,इस पर्व को मनाने के लिए दिल में प्यार होना चाहिए.सब्र और तमन्ना इस पर्व को मानाने के लिया दो अहम् चीजें हैं.मैनपुरी में होली सभी धर्मों के लोग दिल से मानते हुए देख जा सकतें है.होली पर नजीर अकबराबादी ने भी खूब लिखा है…. और क्या खूब लिखा है.गोर फरमाएं …
परियों के रंगों दमकते हों
खूं शीशे जाम छलकते हों
महबूब नशे मैं छकते हों
जब फागन रंग झमकते हों
तब देख बहारें होली की.

एक और दखें

तुम रंग इधर लाओ और हम भी इधर आवें
कर ऐश की तेयारी धुन होली की बर लावें
और रंग की बूंदों की आपस मैं जो ठहराबें
जब खेल चुकें होली फ़िर सिने से लग जावें

होली का यही एक रंग नही है.होली के रंग में डूबने के लिए होली के दर्शन को समझना होगा.इसके मायने जानने होंगें…होली हमारी संस्कृति की श्रेष्ठता को दर्शाती है…..होली हमारी पुरातन बोधिक क्षमता के विकसित होने का प्रमाण देती है…कोई शक नही है की सम्प्रिदयिकता के इस माहोल में होली ही ऐसा पर्व है जो हर दूरी को कम कर सकती है…हर दीवार को गिराने का दम रखती है…….तो देख बहारें होली की………

हृदेश सिंह

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4 टिप्पणियाँ

Posted by on फ़रवरी 28, 2010 in बिना श्रेणी

 

4 responses to “मोहे अपने ही रंग मैं रंग दे

  1. नीरज गोस्वामी

    फ़रवरी 28, 2010 at 12:35 अपराह्न

    आज रंग है ओ माँ रंग दे रे…मकबूल फिल्म का ये गीत याद आ गया…बहुत अद्भुत होली के रंगों में डूबी आप की ये पोस्ट पढ़ कर आनंद आगया…होली की शुभकामनाएं…
    नीरज

     
  2. अमिताभ मीत

    फ़रवरी 28, 2010 at 1:13 अपराह्न

    मोहे अपने ही रंग मैं रंग दे
    तू तो साहिब मेरा महबूब ऐ इलाही
    हमारी चुनरिया पिया की पयरिया वो तो दोनों बसंती रंग दे
    जो तो मांगे रंग की रंगाई मोरा जोबन गिरबी रख ले
    आन परी दरवार तिहारे
    मोरी लाज शर्म सब ले
    मोहे अपने ही रंग मैं रंग दे

    वाह !! बेहतरीन बेहतरीन !!

    होली की शुभकामनाएं !!

     
  3. राज भाटिय़ा

    फ़रवरी 28, 2010 at 3:41 अपराह्न

    आप ओर आप के परिवार को होली पर्व की हार्दिक शुभकामनाये और बधाई

     
  4. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

    फ़रवरी 28, 2010 at 6:02 अपराह्न

    होली की रंगभरी शुभकामनाएँ स्वीकार करें!

     

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