RSS

हो सके तो समझ लेना क्या कहना चाहता हूँ |

10 अक्टूबर

‘इस’ मुद्दे पर क्या लिखू समझ नहीं पाता हूँ ,
अपनी एक पुरानी पोस्ट का लिंक दिए जाता हूँ ,

हो सके तो समझ लेना क्या कहना चाहता हूँ |
हूँ हिन्दू…..गर्व है मुझ को, पर मुस्लिम को भी गले लगता हूँ , 
हो सके तो समझ लेना क्या कहना चाहता हूँ |
खून चाहे तेरा हो, चाहे मेरा हो…क्यों बहे बेकार, नहीं समझ पाता हूँ ,  
हो सके तो समझ लेना क्या कहना चाहता हूँ | 
रास्ते चलते चलते आये मंदिर, मज्जिद, गुरद्वारा या हो चर्च…सब पर ही शीश झुकता हूँ , 

हो सके तो समझ लेना क्या कहना चाहता हूँ |

Advertisements
 
7 टिप्पणियाँ

Posted by on अक्टूबर 10, 2009 in बिना श्रेणी

 

7 responses to “हो सके तो समझ लेना क्या कहना चाहता हूँ |

  1. विनोद कुमार पांडेय

    अक्टूबर 10, 2009 at 1:16 पूर्वाह्न

    बेहतरीन अभिव्यक्ति..अपनी सुंदर बात समझाने का..
    धन्यवाद शिवम जी

     
  2. Udan Tashtari

    अक्टूबर 10, 2009 at 1:27 पूर्वाह्न

    समझ गये जी!! आभार.

     
  3. खुशदीप सहगल

    अक्टूबर 10, 2009 at 2:42 पूर्वाह्न

    शिवम भाई,
    ह से हिंदू…म से मुसलमान…
    ह और म को मिला दो तो बनता है हम…
    जय हिंद…

     
  4. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

    अक्टूबर 10, 2009 at 10:29 पूर्वाह्न

    बहुत अच्छा लिखा है।
    बधाई!

     
  5. Nirmla Kapila

    अक्टूबर 10, 2009 at 12:32 अपराह्न

    समझ गये बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है

     
  6. पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

    अक्टूबर 10, 2009 at 5:30 अपराह्न

    हम तो समझ गए जी….लेकिन हो सकता है कि कुछ लोगों को शायद ये बात समझ में न ही आए !

     
  7. जी.के. अवधिया

    अक्टूबर 10, 2009 at 8:27 अपराह्न

    समझने वाले समझ गए हैं ना समझे ….

     

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

 
%d bloggers like this: