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कुछ न छुपा सकेंगी बीमा कंपनियां

09 अक्टूबर
देश में जीवन बीमा कंपनियों की इतनी भरमार हो गई है कि आम आदमी के लिए यह फैसला करना मुश्किल हो जाता है कि वह किस बीमा कंपनी का चयन करे और उसका आधार क्या हो। बीमा नियामक इरडा के नए दिशानिर्देशों के बाद अब यह मुश्किल कुछ आसान हो जाएगी। इन निर्देशों के फलस्वरूप कोई भी व्यक्ति बीमा कंपनियों के सारे रिकार्ड की जांच-पड़ताल कर अपनी पसंदीदा कंपनी का चयन कर सकेगा।
दरअसल, ऐसी व्यवस्था की जा रही है जिसके तहत बीमा कंपनियों को अब अपने कारोबार और पालिसियों के बारे में हर छोटी-बड़ी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण ने गुरुवार को इस बारे में काफी सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। ये दिशानिर्देश एक नंवबर, 2009 से जीवन बीमा कंपनियों पर लागू होंगे।
बीमा नियामक ने हाल के ग्लोबल संकट और इसके चलते कई नामी-गिरामी बहुराष्ट्रीय बीमा कंपनियों के डूबने से सबक सीखते हुए देश की बीमा कंपनियों पर यह सख्ती लागू की है। इससे ग्राहकों को आसानी से बीमा कंपनियों के बारे में सूचनाएं तो मिल ही जाएंगी, साथ ही सरकार के लिए इन पर नजर रखना भी आसान हो जाएगा। बीमा कंपनियों के वित्तीय हालात की भी लगातार निगरानी की जा सकेगी। इन दिशानिर्देशों के मुताबिक बीमा कंपनियों को अपने अधिकारियों से लेकर अपनी निवेश योजनाओं तक के बारे में हर छोटी-बड़ी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। इसके मुताबिक भारत की सभी बीमा कंपनियों को अपने कारोबार, कंपनी के ढांचे, निवेश योजनाओं सहित अन्य जानकारियों को तिमाही या छमाही तौर पर जारी करना होगा।
इरडा का कहना है कि यह केवल भारत में बीमा कारोबार का सही आकलन करने के लिए ही जरूरी नहीं है, बल्कि देश में कारपोरेट गवर्नेस को बढ़ावा देने के लिए भी बहुत आवश्यक कदम साबित होगा। इस खुलासे में जीवन बीमा कंपनियों को यह तो बताना ही होगा कि ग्रामीण और शहरी इलाकों में अलग-अलग हिस्से में उन्होंने कितनी पालिसियां बेचीं, किस राज्य में कितनी पालिसियां बेची जा रही हैं। इससे बीमा कंपनियों को आगे की रणनीति बनाने में भी आसानी होगी। बाद में यह जानना आसान हो जाएगा कि किस क्षेत्र में किस तरह की पालिसियों का प्रचलन बढ़ा या घटा है। इससे इरडा बीमा के प्रसार के लिए ज्यादा सटीक रणनीति बना सकेगा। ग्राहकों के लिए भी यह जानना आसान होगा कि बीमा कंपनियों की पालिसियां कितना रिटर्न दे रही हैं।
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4 टिप्पणियाँ

Posted by on अक्टूबर 9, 2009 in बिना श्रेणी

 

4 responses to “कुछ न छुपा सकेंगी बीमा कंपनियां

  1. राज भाटिय़ा

    अक्टूबर 9, 2009 at 7:47 अपराह्न

    भारत मै ओर सुधार…. नही कभी सोच भी नही सकते… कुछ नही होगा सिर्फ़ बक बक के .
    धन्यवाद

     
  2. Babli

    अक्टूबर 9, 2009 at 7:50 अपराह्न

    वाह बहुत बढ़िया लिखा है आपने और बिल्कुल सही मुद्दे को लेकर बड़े ही सुंदर रूप से प्रस्तुत किया है !सही में अब तो सभी लोग सोचते हैं की कहाँ जाए मतलब की जीवन बिमा कंपनियों की तो लाइन लग गई है!

     
  3. अजय कुमार झा

    अक्टूबर 9, 2009 at 8:00 अपराह्न

    शिवम जी …बहुत ही काम की जानकारी दी आपने..बीमा कंपनियों पर इस तरह का आरोप लगता ही था और जाहिर है कि सच लगता था..अब इस तरह की बात नहीं हो पायेगी..उम्मीद की जा सकती है

     
  4. ashokemehta

    अक्टूबर 11, 2009 at 7:26 अपराह्न

    कुछ विशेष नहीं होने जा रहा है ! बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण में भी राजनीति शुरू हो गयी है ! मेरा यह अपना अनुभव है कि पहले पहले यहाँ बहुत अच्छा काम हो रहा था, लेकिन अब तो बड़ी बड़ी बीमा कंपनियों द्वारा सुझाई गई स्कीम के अनुसार ही यहाँ काम हो रहे हैं ,नए दिशानिर्देशों के बाद इससे फायदा बीमा कंपनियों का है , निवेशकों को कोई विशेष लाभ नहीं होगा !

     

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