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भैया, हम हाथ क्यूं मिलाते हैं!?

02 अक्टूबर
हाथ मिलाने की प्रथा कब शुरू हुई? इस बारे में कोई निश्चित प्रमाण नहीं है। हालांकि, साक्ष्य ऐसे भी मिले हैं, जिनसे यह प्रमाणित होता है कि यह प्रथा सदियों पुरानी है। कुछ शोधकर्ताओं के अनुसार, हाथ मिलाने की प्रथा की शुरुआत की सर वाल्टर रैले ने। रैले ब्रिटिश कोर्ट में कार्यरत थे और वह समय था लगभग सोलहवीं सदी के आसपास का।
बहरहाल, हाथ मिलाने की इस अनोखी प्रथा से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। मसलन, कहा जाता है कि यदि कोई किसी संक्रामक बीमारी से ग्रसित हो, उनसे हाथ मिलाने से परहेज करना चाहिए। वहीं, मीटिंग में, अभिवादन करने में, बधाई देने के लिए आदि कई अवसरों पर हाथ मिलाने की प्रथा आम है।
विभिन्न संस्कृतियों व देशों में भी यह चलन में है। जैसे, पारंपरिक अमेरिकी लोग जब सार्वजनिक रूप से किसी महिला से हाथ मिलाते हैं, तो वे दाएं हाथ में ग्लव्स जरूर पहने होते हैं। लेकिन किसी समारोह या उत्सव में वे ऐसा नहीं करते। दूसरी तरफ, यूरोप के कुछ देशों में ग्लव्स पहनकर हाथ मिलाने को बैड मैनर्स से जोड़कर देखा जाता है।
गिनीज बुक में हाथ मिलाने को लेकर कई तरह के रिकॉर्ड दर्ज हैं। मेयर जोजफ लैजरो एक ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने एक दिन में 11, 000 लोगों से हाथ मिलाने का रिकॉर्ड दर्ज करवाया। यह रिकॉर्ड गिनीज बुक ऑफ व‌र्ल्ड रिकॉ‌र्ड्स में दर्ज हुआ। इससे पहले यह रिकॉर्ड अमेंरिकी राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट के नाम था। उन्होंने एक दिन में कुल 8,513 व्यक्तियों से हाथ मिलाकर यह रिकॉर्ड अपने नाम किया था। गिनीज बुक में साढ़े नौ घंटे तक हाथ मिलाने का अनोखा रिकॉर्ड है, जो आज भी बरकरार है।
अमेरिका में सोल ब्रदर हैंडशेक या यूनिटी हैंडशेक का चलन लगभग साठ के दशक में खूब प्रचलन में था। इसमें अफ्रीकी और अमेरिकी लोग आपस में हाथ मिलाते थे। आज भी यह प्रथा अमेरिका के अलग-अलग प्रांतों में कायम है।
हाथ मिलाने के तरीकों को व्यक्ति की पर्सनैल्टी से जोड़कर देखा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि यदि कोई पूरे दमखम या गर्मजोशी से हैंडशेक करता है, तो यह संबंधित व्यक्ति की मजबूत इच्छाशक्ति की ओर संकेत करता है और इसके विपरीत ढीलेपन से हाथ मिलाना कमजोर व्यक्तित्व की निशानी होती है।
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4 टिप्पणियाँ

Posted by on अक्टूबर 2, 2009 in बिना श्रेणी

 

4 responses to “भैया, हम हाथ क्यूं मिलाते हैं!?

  1. जी.के. अवधिया

    अक्टूबर 2, 2009 at 1:15 अपराह्न

    बहुत अच्छी जानकारी!!

    मैं समझता हूँ कि हमारे देश में हाथ मिलाने की प्रथा शायद विदेश से ही आई होगी।

     
  2. पी.सी.गोदियाल

    अक्टूबर 2, 2009 at 1:18 अपराह्न

    “हाथ मिलाने के तरीकों को व्यक्ति की पर्सनैल्टी से जोड़कर देखा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि यदि कोई पूरे दमखम या गर्मजोशी से हैंडशेक करता है, तो यह संबंधित व्यक्ति की मजबूत इच्छाशक्ति की ओर संकेत करता है और इसके विपरीत ढीलेपन से हाथ मिलाना कमजोर व्यक्तित्व की निशानी होती है।”

    एक अच्छा आलेख, मगर साथ ही यह भी कहूंगा कि न सिर्फ व्यक्तित्व अपितु उस व्यक्ति के अन्दर पक रहे अच्छे और बुरे खयालातो को भी प्रतीकात्मक तौर पर इंगित करती है , हाथ मिलाने की भाषा !

     
  3. सर्वत एम०

    अक्टूबर 2, 2009 at 1:44 अपराह्न

    न जाने कहाँ-कैसे भटकते हुए इस ब्लॉग तक आ पहुंचा और ठहर गया. कमाल की अनूठी जानकारी एकत्र कर रखी है आपने. सदियों पहले, ईसाइयत के दौर में, हाथ मिलाने की बातें कही गयी हैं. इसलाम में तो शुरूआती दौर से ही मुसाफहा(हाथ मिलाना) रिवाज में था.
    आप बेहतर लिख रहे, अब इस ब्लॉग पर फिर आना पड़ेगा

     
  4. राज भाटिय़ा

    अक्टूबर 2, 2009 at 2:44 अपराह्न

    अच्छा लेख है

     

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