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कलम की जगह पिस्तौल थामते नन्हे हाथ

25 अगस्त

इसे क्राइम का बदलता ट्रेंड कहें या आपराधिक गिरोहों की रणनीति का हिस्सा अथवा तीव्र गति से बदलती सामाजिक संरचना का प्रभाव कि बाल अपराधियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

सहरसा में गत आठ माह में ही पुलिस ने एक दर्जन से अधिक ऐसे बाल अपराधियों को गिरफ्तार किया, जिनकी मासूमियत को देख उनके कारनामों पर सहसा विश्वास करना आसान नहीं। इन बच्चों की गिरफ्तारी चोरी, लूट, अपहरण, आ‌र्म्स एक्ट से लेकर हत्या तक के मामले में हुई है। इस तरह बच्चे कलम की जगह पिस्तौल लेकर चल रहे हैं।

पुलिस ने स्वीकार किया कि अपराधी गिरोह बच्चों की मासूमियत का फायदा उठा रहे हैं। एसपी राजेश कुमार ने कहा कि बाल अपराधियों को चिह्नित करने में पुलिस को खासी परेशानी होती है। ऐसे में उन्होंने माता-पिता से बच्चों पर निगरानी रखने की अपील की।

आंकड़ों पर गौर करें तो 31 जनवरी 09 को सदर पुलिस ने वाहन चेकिंग के दौरान एक देसी पिस्तौल, कारतूस व चाकू के साथ रणवीर झा को गिरफ्तार किया था। उसकी उम्र महज 17 वर्ष थी। उसने लूट की कई घटना में संलिप्तता स्वीकार की थी। 23 फरवरी 09 को बैजनाथपुर ओपी पुलिस ने गम्हरिया गांव स्थित बिन्दो यादव के दरवाजे पर अपराध की योजना बना रहे पटुआहा गांव निवासी अंकुश कुमार उर्फ टनटन, बैजनाथपुर निवासी अम्बेक कुमार, केशव कुमार, गम्हरिया गांव निवासी सुबोध कुमार को असलहे के साथ गिरफ्तार कर लिया। सभी की उम्र 15 से 18 वर्ष के बीच थी। पुलिस ने इनके पास से यूएसए निर्मित छह राउंड की पिस्टल, देसी पिस्तौल, जिंदा कारतूस, खूखरी, दो बड़े चाकू बरामद किए थे।

पूछताछ में पता चला कि सभी छात्र हैं। एक सप्ताह के अंदर हुई तीन राहजनी की घटना से आजिज सदर पुलिस ने 13 अप्रैल 09 की रात जब सिविल वर्दी में रिक्शे पर बैठकर लुटेरों का पता लगाने निकली तो शहर के जिला स्कूल के समीप तीन अपराधियों ने हथियार के बल पर रिक्शा रुकवाया पर, पहले से तैयार थानाध्यक्ष रंजीत बत्स ने अन्य पुलिसकर्मियों के सहयोग से तीन अपराधियों को दबोच लिया।

पर, सरगना अजय यादव भागने में कामयाब रहा। दबोचे गये इस्लामियां चौक का राजवंश राय, फकीर टोला का विशाल चौधरी और शंकर झा नौवीं-दसवीं कक्षा का छात्र था। इनके पास से पुलिस ने दो लोडेड देशी पिस्तौल, चार जिंदा कारतूस, एक चाकू और तीन मोबाइल बरामद किया।

19 जुलाई 09 को सदर थाना क्षेत्र के नरियार गांव में राजकुमार ने बिजलपुर गांव के दो अन्य लोगों के साथ मिलकर अपने ही दोस्त खुशीलाल दास उर्फ छोटेलाल की गला रेतकर हत्या कर दी। बताया जाता है कि राजकुमार गत वर्ष ही मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण किया था। बाद में राजकुमार ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया।

चोरी की बढ़ती घटनाओं के बीच जब सदर पुलिस ने 24 जुलाई 09 को बंगाली बाजार स्थित एक होटल से 12 से 15 वर्ष उम्र के सुनील राम, प्रणव साह, छोटे कुमार राम नामक तीन बच्चों को पकड़ा तो उनके चेहरे की मासूमियत को देखकर लोगों को विश्वास नहीं हो रहा था।

10 अगस्त को जिला स्कूल के बाहर नौंवी वर्ग के एक छात्र ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर अपने ही सहपाठी रमेश झा रोड निवासी सुधीर सर्राफ के पुत्र शेखर सर्राफ को बस इसलिए चाकू मारकर घायल कर दिया, क्योंकि उसने परीक्षा के दौरान उसे नकल नहीं करने दिया था।

12 अगस्त 09 को सोनवर्षा राज थाना क्षेत्र के गढ़बाजार गांव में भवेश कुमार यादव [16 वर्ष] ने अपने पिता चन्देश्वरी यादव की गोली मारकर हत्या कर दी और शव को मकई के खेत में फेंक दिया।

क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक

सर्वनारायण सिंह रामकुमार सिंह महाविद्यालय में मनोविज्ञान के प्रोफेसर डा. कमलेश प्रसाद सिंह इस कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं कि बाल अरापाधियों की संख्या में वृद्धि का सबसे बड़ा कारण संयुक्त परिवार का बिखराव हैं। इलेक्ट्रानिक चैनल, हिंसक फिल्म व टेलीविजन के साथ-साथ भौतिकवाद के बहकावे में आकर बच्चे अपनी आवश्यकता को जल्द पूरा करने के लिए अपराध को आसान हथियार मान बैठते हैं। मां-बाप बच्चे पर समय नहीं दे पाते और उनकी राह बिगड़ती चली जाती है।

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3 टिप्पणियाँ

Posted by on अगस्त 25, 2009 in बिना श्रेणी

 

3 responses to “कलम की जगह पिस्तौल थामते नन्हे हाथ

  1. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

    अगस्त 25, 2009 at 8:51 पूर्वाह्न

    यह अच्छे लक्षण नही हैं,देश को बरबाद कर देंगे।

     
  2. Dr. Smt. ajit gupta

    अगस्त 25, 2009 at 10:54 पूर्वाह्न

    आधुनिकता के नाम पर भोगवादी प्रवृति का जन्‍म हो चुका है, और यह सुरसा के मुँह की तरह तेजी से बढ रही है। जिनके माता-पिता ध्‍यान दे रहे हैं वे भी पैसा कमाने की मशीन ही बन रहे हैं और जो ध्‍यान नहीं दे पा रहे या बच्‍चों का पढाई में मन नहीं है वे कलम की जगह बंदूक थाम रहे हैं। सभी को पैसा चाहिए। जिनके हाथों में कलम है वे भी उसे बंदूक की तरह ही काम ले रहे हैं।

     

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