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डिप्रेशन की दवा सोचसमझ कर लें

12 अगस्त


बदलती जीवनशैली के साथ डिप्रेशन हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गया है। इसका सबसे बुरा प्रभाव युवाओं पर पड़ा है। अत्यधिक महत्वाकांक्षा और खुद से उम्मीदों का दबाव इतना ज्यादा होता है कि इसे झेल नहीं पाते। नतीजा तनाव और डिप्रेशन के रूप में सामने आता है। तनाव से उबरने के लिए वे दवा लेने लगते हैं। लेकिन एक नए शोध में दावा किया गया है कि तनाव और अवसाद से बचने के लिए 25 से कम उम्र के युवा जो दवाएं लेते हैं वह उनमें आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ा देती है। यह खतरा तब और बढ़ जाता है, जब मानसिक समस्याओं से उबरने के लिए वे इन दवाओं पर निर्भर हो जाते हैं।

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक जब अधिक उम्र के लोग यही दवाएं लेते हैं तो उन्हें आत्महत्या के विचारों से उबरने में मदद मिलती हैं। शोधकर्ताओं ने 25 साल से कम उम्र के एक हजार अवसादग्रस्त लोगों के रिकार्ड का अध्ययन किया। इन लोगों ने डिप्रेशन दूर करने के लिए दवाएं ली थीं। शोधकर्ताओं ने इनसे आत्महत्या का ख्याल आने के बारे मे सवाल भी किए। उन्होंने पाया कि इनमें से आठ ने आत्महत्या कर ली थी। 134 ने प्रयास किए थे, दस ने कोशिश की थी जबकि 378 ने आत्महत्या का ख्याल आने की बात स्वीकारी।

अमेरिका के मेरीलैंड स्थित यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के स्वास्थ्य अधिकारी मार्क स्टोन के मुताबिक, इसका यह अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए कि युवाओं को तनाव की दवा लेनी ही नहीं चाहिए। लेकिन आपको इसके खतरे और फायदे को लेकर सचेत रहना चाहिए। यह शोध बताता है कि अवसाद का शिकार कोई युवा लगातार आत्महत्या की बात कर रहा है तो ऐसा दवाओं के कारण हो सकता है। आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के मनोचिकित्सक जान गिडीज के मुताबिक अवसाद से पीड़ित लोगों को नियमित तौर पर मेडीटेशन करना चाहिए। साथ ही अवसाद का इलाज कराने आए युवा का खास ख्याल रखने की जरूरत है।

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5 टिप्पणियाँ

Posted by on अगस्त 12, 2009 in बिना श्रेणी

 

5 responses to “डिप्रेशन की दवा सोचसमझ कर लें

  1. दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

    अगस्त 13, 2009 at 12:12 पूर्वाह्न

    सारी दवाइयाँ ही सोच समझ कर लेनी चाहिए। अब तो यह भी कि डाक्टर के पास भी बहुत सोच समझ कर जाना चाहिए।

     
  2. AlbelaKhatri.com

    अगस्त 13, 2009 at 12:16 पूर्वाह्न

    sahi samay par sahi baat kah kar aap nek karya kar rahe hain aapko haardik badhaai !

     
  3. शिवम् मिश्रा

    अगस्त 13, 2009 at 12:27 पूर्वाह्न

    अलबेला जी,सब आपका ही आर्शीवाद है |

     
  4. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

    अगस्त 13, 2009 at 6:59 पूर्वाह्न

    शरीर है तो रोग भी होंगे ही,रोग होगे तो डॉक्टर के पास भी जाना होगा और दवा भी लेनी हीहोगी, परन्तु सोच समझकर।बढ़िया सलाह।आभार।

     
  5. Mrs. Asha Joglekar

    सितम्बर 4, 2009 at 11:10 अपराह्न

    sahee hai aapka kehana. isee sandarbh men maine padha hai ki kela depression par kafee asarkarak hai. isametriptophwn nwmwk ek chemicakl hota hai jo ceratonin kee matrabadha deta hai. jisase man me khushee ki feeling aatee hai.

     

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