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भ्रूण में ही दिखेगा बीमारियों का ब्लू प्रिंट

23 जुलाई


स्वस्थ्य हो,सुंदर हो, काले बाल और सुंदर आंखें हों, भविष्य में कभी बीमार न पड़े। ऐसा बच्चा चाहिए तो भ्रूण की ‘कारयोमेपिंग’ करानी पड़ेगी। ‘कारयोमेपिंग’ तीन दिन में 15 हजार तकलीफों का ‘ब्लू प्रिंट’ उतार देगी। इस ‘ब्लू प्रिंट’ से जिंदगी में खतरों का आइना दिखाकर फिर डाक्टर पूछेंगे कि बताओ कौन से भ्रूण को अपने आंगन का फूल बनाना चाहेंगे।

मौजूदा प्रीइम्प्लांटेशन जेनेटिक डायग्नोसिस [पीजीडी] विधि से केवल गर्भस्थ शिशु में जन्मजात विकृतियों का पता चल पाता है। मगर भारत में लिंग परीक्षण पर प्रतिबंध के कारण इस विधि के इस्तेमाल की अनुमति नहीं है। पिछले दिनों हालैंड में यूरोपियन सोसायटी ऑफ ह्यूमन रिप्रोडक्टिव एंड एम्ब्रियोलोजी की 25वीं कांफ्रेंस में ‘कारयोमेपिंग’ के प्रदर्शन से चिकित्सा विशेषज्ञों की आंखें फटी रह गयीं। अमेरिका और इंग्लैंड के वैज्ञानिकों द्वारा ईजाद यह विधि भ्रूण का परीक्षण कर 15 हजार तरह की क्रोमोजोम्स एब्नार्मलिटीज बता सकती हैं। ये क्रोमोजोम्स एब्नार्मलिटीज ही भविष्य में तरह-तरह की बीमारियों को जन्म देती हैं।

अभी जेनेटिक विकृतियों का पता गर्भस्थ शिशु के परीक्षण से चल जाता है। ये विकृतियां मुख्य रूप से रीढ़ में गांठ, ब्रेन डिफेक्ट, टेढ़े हाथ-पैर, किडनी में खराबी आदि सामने आई हैं। जिंदगी में होने वाली बीमारियों की बाबत कोई भविष्यवाणी नहीं हो पाई है। शोधकर्ताओं का कहना था कि परीक्षण रिपोर्ट में दर्ज क्रोमोजोम्स कंडीशन्स यह भी बता देंगी कि बच्चा भविष्य में किस कद-काठी का होगा। शारीरिक और मानसिक स्थिति क्या रहेगी। आंखें और बालों का रंग भी जन्म से पहले ही निर्धारित किया जा सकेगा। परखनली शिशु के लिए तैयार भ्रूणों का इस विधि से परीक्षण कराके निरोग भ्रूण चुनकर अभिभावक जन्म की इजाजत दे सकेंगे।

इस कांफ्रेंस में आगरा से डा.नरेंद्र मल्होत्रा और डा.जयदीप मल्होत्रा ने भी भाग लिया था। डा.मल्होत्रा दंपती ने बताया कि लंदन में बहुत जल्द ही यह विधि लान्च हो जाएगी। परीक्षण के लिए खर्च करीब 250 पाउंड [1 लाख 80 हजार रुपये] आएगा। परीक्षण में दो से तीन दिन लग जाएंगे। लेकिन आने वाले समय में यह समय 18 से 24 घंटे में सिमट जाएगा। सामान्य गर्भ में भी इस विधि का उपयोग किया जा सकेगा।

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5 टिप्पणियाँ

Posted by on जुलाई 23, 2009 in बिना श्रेणी

 

5 responses to “भ्रूण में ही दिखेगा बीमारियों का ब्लू प्रिंट

  1. रंजना

    जुलाई 23, 2009 at 7:03 अपराह्न

    समझ में नहीं आ रहा की यह मानवता के लिए वरदान होगा या अभिशाप…….वैसे बड़ी ही अच्छी जानकारी दी आपने……बहुत बहुत धन्यवाद इसके लिए….

     
  2. शिवम् मिश्रा

    जुलाई 23, 2009 at 10:44 अपराह्न

    रंजना जी ,विज्ञानं हमेशा ही पैदा होता है एक वरदान के रूप में , उसको अभिशाप कुछ लालची और अति चतुर लोग बना देते है |अब यहाँ क्या होगा यह तो समय के गर्भ में है |

     
  3. संगीता पुरी

    जुलाई 23, 2009 at 11:10 अपराह्न

    अच्‍छी जानकारी दी है आपने .. धन्‍यवाद !!

     
  4. शरद कोकास

    जुलाई 23, 2009 at 11:43 अपराह्न

    एक लाख अस्सी हज़ार रहने दो भाई अपने बच्चे वैसे ही अच्छे

     
  5. शिवम् मिश्रा

    जुलाई 24, 2009 at 12:26 पूर्वाह्न

    शरद भाई ,अपन तो अपना योगदान दे चूके आगे की राम जाने |

     

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