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माया ही माया ……..सब माया है !!!!!!

26 जून



तो आखिरकार तैयार हो ही गई माया और कांशीराम की ४० मूर्तियाँ ! और शीघ्र ही मायावती जी इनका अनावरण करने जा रही है ! बात इसलिए ख़ास है कि ये मूर्तिया उत्तरप्रदेश की एक विशाल सरकारी जमीन पर लगने को तैयार है ये हमारे इस तथाकथित सबसे बड़े लोकतंत्र की इस सदी के दो महान राजनेताओ की मूर्तिया है, एक की जीते जी, और दूसरे की मरणोपरांत ! जीते जी इसलिए कि बाद में उत्तराधिकारियों पर भरोसा नहीं है कि वे बनायेंगे भी या नहीं, इसलिए अभी से निपटा दिया ! दूसरी ख़ास बात है इनकी कीमत, एक अरब चौरानब्बे करोड़ की लागत से तैयार इन मोर्तियो की चमक ही कुछ ख़ास है ! जो बात ख़ास नहीं है उसे भी लिख दूं, और वह यह है कि इस एक अरब चौरानब्बे करोड़ रूपये में उत्तरप्रदेश के सारे दलित परिवार करीब चार महीने तक सरकारी खर्चे पर भंडारा लगाके मुफ्त में भरपेट खिलाये जा सकते थे ! खैर, ऐंसी बाते लोकतंत्र में ज्यादा अहमियत नहीं रखती, दलित भूखे रहते है तो वो उनके अपने कर्म है, उससे मायावती बहन को क्या लेना देना ? बहन मायावती जी के लिए तो वो क्या खुशनुमा पल होंगे जब कभी फुरसत पर वह अपने बनाए ( चाहे वह लोगो की गाढे टैक्स की कमाई से ही क्यों न बने हो ) पार्क में अपनी ही मूर्तियों के बीच से गुजरते हुए भ्रमण करेंगी और कबूतर तथा अन्य पक्षी, मूर्तियों के सिर में बैठकर अपना पेट हल्का करता देखेगी ! सच में किस्मत वालो को ही ऐसे सीन देखने को नसीब होते है !
प्रदेश की गरीब जनता के शब्दों में “हमार एसन नसीब कहाँ बाबू , हम तो गरीब जनता बा | पन बाबू हम टैक्स जरूर देत है मूर्ति लगना भी तो जरूरी बा न बाबू ………..पार्क आख़िर बनता तो हम जैसन के लिए ही है न ????”

अब यह तो हम नहीं जानते की पार्क किन के लिए बनता है पर हाँ यह जरूर जानते है इन् पार्को और समाराको के चक्कर में हम जरूर बन जाते है …….. अरे “वोही” जो दिन में सोता है और रात में जागता है …… क्यों समझ गए ??

टाईम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित एक लेख यहाँ प्रस्तुत है |

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8 टिप्पणियाँ

Posted by on जून 26, 2009 in बिना श्रेणी

 

8 responses to “माया ही माया ……..सब माया है !!!!!!

  1. Puttu Ke Papa

    जून 26, 2009 at 5:03 अपराह्न

    Sab Maya hai Bhai Sab Maya!!!!!! is kahani se ye shiksha milti hai ki duniya main keval do hi varg hote hai Shashk aur Shashit na ki Agde aur Pichade. jis ko moka milega wo hi dhoyega.

     
  2. नीरज गोस्वामी

    जून 26, 2009 at 5:33 अपराह्न

    शर्म शर्म शर्म

     
  3. Udan Tashtari

    जून 26, 2009 at 5:41 अपराह्न

    मायावति की तो एक ही दिख रही है. ४० तो हाथियों की हैं, उन्हें भी गिना है क्या?शर्मनाक!! ये कैसा लोकतंत्र है?

     
  4. डॉ. मनोज मिश्र

    जून 26, 2009 at 5:48 अपराह्न

    हमारे आपके कहने से क्या होगा उनका वोट बैंक कहे तब न बात बनेगी .

     
  5. अभिषेक ओझा

    जून 26, 2009 at 6:55 अपराह्न

    इससे बड़ा शर्म क्या हो सकता है !

     
  6. परमजीत बाली

    जून 26, 2009 at 8:41 अपराह्न

    देश के लिए मायावती के किए इस महान कार्य को देश सदा याद रखेगा….:))

     
  7. Suman

    जून 26, 2009 at 11:26 अपराह्न

    thik hai.

     
  8. Pt.डी.के.शर्मा"वत्स"

    जून 27, 2009 at 1:07 अपराह्न

    भीम राव अन्बेडकर जी और कांशीराम जब दोनो ही उत्तरप्रदेश की वसीयत इनके नाम लिख गये हैं तो फिर ये अपनी पैतृ्क सम्पत्ति का जैसे चाहें भोग करें!!!!!!

     

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