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" दर्द ,प्राइवेट नौकरी का"

06 जून

सरकारी कर्मचारियों को देखकर बहुत जलन होती है। जरूर पिछले जन्म में बहुत पुण्य किये होंगे, जो सरकारी नौकरी मिली। पॉँच साल के अपने अनुभव से मैं तो ये कह सकता हूं। हमने बहुत पाप किए होंगे। सुबह 9 बजे से लेकर शाम तक जो हाल होता है उसके बाद तो राम रखे। बुजुर्ग कहते हैं कि “भाई पैसे बहुत पर पूरा तेल निकाल लेते हैं प्राइवेट नौकरी में” कभी पूरी बात सही थी पर अब केवल पीछे की शब्द ही सही रह गये है। पैसा तो नये वेतन आयोग के बाद फिर भाग्यशाली लोग ले गए। उपर से मंदी की मार आ गई। सोचता हूं कम से कम इस जन्म में तो कुछ पुण्य कर लू, जिससे अगला जन्म तो सुधर जाए।

भाई किसी की तो ज्यादा नहीं कह सकता, पर अपनी तो “बजा” रखी है। प्रमोशन के लिये 100 नाटक और काम की कमी नहीं ,जो तेरा काम है वो तो तू कर ही और जो तेरा काम नहीं वो भी तू कर। क्‍यूंकि तू ऑफिस का “मालिक” है हर काम तेरा ही है। आदत शुरु से ही खराब रही है( एएचएस से ही बिगड़ गयी थी ) ना किसी को कर नहीं सकते, सोचते हैं कि चल कुछ सीखने को ही मिलेगा अब भाई जब आदत अपनी ही खराब तो उसको भुगतना तो पडेगा ही !!

जब सेल्‍स में था तब ऑफिस की और ज़िम्मेदारी ले रखी थी, अब कुछ ज्यादा ही ! अभी मेरा ऑफिस नई बिल्डिंग मे शिफ्ट हो रहा है। बिल्डिंग ढूँढने, रेट फिक्स करने , दुनिया भर की अप्रोवल, बहुत सारे लीगल, फाइनेंस, रि शिफ्टिंग डिपार्टमेंन्‍टस में बात करो। इनके कागज पूरे करना। उफ़ . ट्रांसपोर्ट, कारपेंटर, बिजलीवाला ढूँढना है और पुराने मालिक से बना कर रखो। उसका क्लेम कम से कम रखना है। ऑफिस बदलने पर सरकारी विभागों को सूचना, लोकल प्रचार भर जरूरी है। ऐसा नहीं है कि इसके लिये अलग बन्दा नहीं है, है एक वो भी 60-70 ऑफिस पर एक। तो भाई हम को ही करना है, और ये सब कुछ करने की आखरी तारिख ३०
जून। नहीं हुआ तो हमारे लिये “प्रेम पत्र ” और इन सब के अलावा ऑफिस तो है ही, सेल्‍स के टारगेट भी पूरे करने हैं।

करना सुब कुछ है पर प्रमोशन , भाई विचार चल रहा है , हो जायेगा ,चिंता भी मत कर और छोड़कर भी मत जा। वैसे बताता चलूं कि पिछले साल हर चीज में हम अपने रीजन मे नंबर वन थे पर प्रमोशन के लिये तरस गये।

भाई बताओ ना की अगले जन्म के लिये कौनसा पुण्य करूं कि सरकारी नौकरी मिले।
कोई जुगाड आपको पता हो तो टिप्‍पणी अवश्‍य करें !!!

( मेरे एक मित्र प्रशांत गुप्ता का दर्द है यह , सोचा आप सब से भी बांट लू | )

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1 टिप्पणी

Posted by on जून 6, 2009 in बिना श्रेणी

 

One response to “" दर्द ,प्राइवेट नौकरी का"

  1. प्रशांत गुप्ता

    अगस्त 3, 2009 at 4:48 अपराह्न

    dhanyvad apnai humai mitra banaya…pr mitra ki cheej chori nahi krtai hai

     

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