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भला – बुरा ,बुरा – भला ||

02 अप्रैल

भला बुरा , बुरा भला है ,खोटे पर सब खरा भला है |
झूट सच का क्या पता है ,एक गम एक बड़ी बला है ,
चल ढाल सब एक जैसी ,सारा कुछ ही नापा तुला है |
सच के सर जब धुँआ उठे तो ,झूट आग में जला हुआ है ,
भला बुरा ,बुरा भला है ,खोटे पर सब खरा भला है |
काला है तो काला होगा ,मौत का ही मसाला होगा,
चूना कत्था ज़िन्दगी तो सुपारी जैसा छाला होगा |
पाप ने जना नहीं तो पापियों ने पाला होगा,
भूख से निकल गया था ,भूख से निकला होगा |
भला बुरा , बुरा भला है ,खोटे पर सब खरा भला है |
वोह जो अब कहीं नहीं है उस पे भी तो यकीं नहीं है ,
रहेता है जो फलक फलक पे ,उसका घर भी ज़मी नहीं है |
अक्कल का ख्याल अगर हो , शक्ल से भी हसी नहीं है ,
पहेले हर जगह पे था वोह, सुना है अब वोह कहीं नहीं है |
बुरा भला है , भला बुरा है ||

—– गुलज़ार

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1 टिप्पणी

Posted by on अप्रैल 2, 2009 in बिना श्रेणी

 

One response to “भला – बुरा ,बुरा – भला ||

  1. हृदेश सिंह

    अप्रैल 3, 2009 at 10:55 पूर्वाह्न

    mjha agya dost

     

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